रांची। रांची विश्वविद्यालय से जुड़े 96 अतिथि शिक्षकों के मानदेय का मामला लंबे समय से लंबित बताया जा रहा है। अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इन शिक्षकों को करीब 22 महीनों से मानदेय नहीं मिला है। भुगतान में देरी के कारण कई शिक्षकों के सामने घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में परेशानी की स्थिति सामने आई है।
अलग-अलग कॉलेजों में कार्यरत हैं 96 अतिथि शिक्षक
रिपोर्ट के अनुसार, रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कई कॉलेजों में कुल 96 अतिथि शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। इनमें रांची वीमेंस कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, डोरंडा कॉलेज, जेएन कॉलेज, एसएस मेमोरियल कॉलेज सहित सिमडेगा, खूंटी, बुंडू, बेड़ो, सिसई, मांडर, लोहरदगा, गुमला और बानो के संस्थान शामिल हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति का सिलसिला 2016 से जुड़ा है। शुरुआती व्यवस्था में प्रति कक्षा ₹500 और अधिकतम ₹30,000 तक मानदेय का प्रावधान बताया गया था। बाद के प्रावधानों में नेट उत्तीर्ण कक्षा आधारित शिक्षकों के लिए ₹57,700 और अतिथि शिक्षकों के लिए ₹50,000 मासिक मानदेय का उल्लेख किया गया है।
मानदेय नहीं मिलने से परिवार पर असर
लंबे समय तक भुगतान नहीं होने का असर शिक्षकों की निजी जिंदगी पर भी पड़ा है। रिपोर्ट में मारवाड़ी कॉलेज के अतिथि शिक्षक अंकित शर्मा का उदाहरण दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक परेशानी के कारण वह अपनी बेटी की स्कूल फीस नहीं भर सके, जिसके बाद बेटी का नाम स्कूल से कटवाना पड़ा और पत्नी-बेटी को गांव भेजना पड़ा। किराया नहीं चुका पाने के कारण उन्हें रांची में अपना किराए का घर भी छोड़ना पड़ा।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं बताया गया है। रिपोर्ट में अन्य शिक्षकों के कर्ज लेने और अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सामान बेचने जैसी परिस्थितियों का भी उल्लेख है।
कॉलेज आने-जाने का खर्च जुटाना भी मुश्किल
मानदेय का भुगतान लंबे समय तक नहीं होने से कुछ शिक्षकों के लिए कॉलेज तक आने-जाने का खर्च जुटाना भी कठिन होने की बात सामने आई है। इससे शिक्षकों के सामने एक तरफ अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभाने और दूसरी तरफ परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
मानदेय भुगतान को लेकर अतिथि शिक्षकों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने शिक्षकों के पक्ष में आदेश दिया था और अंतरिम व्यवस्था के तहत राज्य सरकार को ₹1.5 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बावजूद शिक्षकों को भुगतान नहीं मिला था।
यहां यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि यह विवरण अगस्त 2026 की रिपोर्ट के समय की स्थिति को दर्शाता है। बाद में भुगतान या प्रशासनिक स्तर पर कोई नया निर्णय हुआ हो तो उसे अलग से अपडेट किया जाना चाहिए।
शिक्षकों की मुख्य मांग क्या है?
अतिथि शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा उनके लंबित मानदेय का भुगतान है। लंबे समय तक भुगतान अटकने से शिक्षकों की व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति के साथ-साथ उनकी नौकरी और भविष्य की अनिश्चितता का सवाल भी जुड़ता है।
विश्वविद्यालय और संबंधित प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई नया आधिकारिक जवाब या भुगतान की स्थिति सामने आने पर खबर को अपडेट करना महत्वपूर्ण होगा।
शिक्षा व्यवस्था में अतिथि शिक्षकों की भूमिका
अतिथि शिक्षक कॉलेजों में विभिन्न विषयों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में योगदान देते हैं। ऐसे में उनके मानदेय से जुड़ा मामला केवल व्यक्तिगत भुगतान का विषय नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता और काम करने की परिस्थितियों से भी जुड़ा है।
रांची विश्वविद्यालय से जुड़े इन शिक्षकों का मामला यह सवाल भी उठाता है कि लंबे समय तक सेवा लेने के बाद पारिश्रमिक के भुगतान में देरी होने पर उसके समाधान के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी समयबद्ध होनी चाहिए।

