रांची विश्वविद्यालय के 96 अतिथि शिक्षकों को पिछले 22 महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। एक शिक्षक को बेटी का स्कूल छुड़वाना पड़ा और बेघर होना पड़ा, जबकि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भुगतान नहीं हुआ है।
मिथिलानी डेस्क, रांची। जब कोई व्यक्ति पूरे महीने मेहनत करता है तो महीने के आखिर में उसे अपने काम की कमाई मिलने का इंतजार रहता है। लेकिन जरा सोचिए, अगर आप महीनों तक काम करें और बदले में एक रुपया भी न मिले तो घर कैसे चलेगा?
बच्चों की फीस, मकान का किराया और रोजमर्रा का खर्च कैसे उठेगा? रांची विश्वविद्यालय के 96 अतिथि शिक्षक आज इसी सवाल के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं।
पैसे का अभाव के कारण मारवाड़ी कॉलेज के अतिथि शिक्षक अंकित कुमार ने अपनी बेटी का नाम स्कूल से कटवा दिया और परिवार को गांव भेज दिया, रांची में उनके मकान मालिक ने उन्हें घर से निकाल दिया और वो बेघर हो गए।

