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लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में सावन के दौरान भगदड़ मचने से कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जिससे पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। यह मंदिर 49 साल पहले एक विशाल शिवलिंग के प्रकटीकरण से स्थापित हुआ था और अब बिहार सरकार इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा दे चुकी है।

मिथिलानी डेस्क, लखीसराय। बिहार के प्रमुख शैव तीर्थों में शुमार लखीसराय का विश्वप्रसिद्ध श्री इंद्रदमेश्वर महादेव अशोकधाम मंदिर सोमवार को उस वक्त गहरे शोक में डूब गया, जब सावन की भारी भीड़ के दौरान मची अचानक भगदड़ में आधे दर्जन से ज्‍यादा श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। बिहार, झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश के लाखों शिवभक्तों की अगाध आस्था का केंद्र रहा यह भव्य धाम आज एक हृदयविदारक हादसे के कारण राष्ट्रीय फलक पर चर्चा में है।

लखीसराय जिला मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर दूर नगर परिषद क्षेत्र के रजौना चौकी स्थित यह पावन धाम न केवल अगाध श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि देश के विशालतम शिवलिंगों में से एक होने के कारण पूर्वी भारत का एक बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बन चुका है।

7 अप्रैल 1977: जमीन से प्रकट हुआ था विशाल पालकालीन शिवलिंग

इस दिव्य धाम के प्रकटीकरण की गाथा 49 वर्ष पुरानी है। 7 अप्रैल 1977 को रजौना चौकी गांव के दो बालक अशोक यादव और गजानन साव मवेशी चराने के दौरान खेत में खेल रहे थे। इसी दौरान जमीन के भीतर उन्हें काले चमकदार पत्थर का एक विशाल हिस्सा दिखाई दिया।

खुदाई करने पर वहां से पालकालीन विशालकाय दुर्लभ काले प्रस्तर का शिवलिंग प्रकट हुआ। स्थानीय विद्वान पंडित कामेश्वर पांडेय के परामर्श पर इस ऐतिहासिक स्थल का नामकरण चरवाहे अशोक के नाम को जोड़ते हुए ‘श्री इंद्रदमेश्वर महादेव अशोकधाम’ रखा गया।

शंकराचार्य ने रखी थी आधारशिला, 111 कट्ठे में फैला है भव्य परिसर

शिवलिंग के प्रकटीकरण के बाद यहां श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हुआ। इसके बाद 11 फरवरी 1993 को पुरी के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के कर-कमलों द्वारा मंदिर की विधिवत आधारशिला रखी गई।

वर्ष 2001 में मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया और 111 कट्ठा भूमि पर भव्य मंदिर श्रृंखला का निर्माण कराया गया। आज इस विशाल परिसर में मुख्य शिवलिंग के साथ-साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और अन्य देवी-देवताओं के नयनाभिराम मंदिर स्थापित हैं। प्रत्येक वर्ष यहां निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह का भव्य आयोजन भी ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

राजकीय महोत्सव का दर्जा और 14 करोड़ से तिरुपति की तर्ज पर शिवगंगा

अशोकधाम की बढ़ती महिमा को देखते हुए बिहार सरकार ने वर्ष 2024 में ‘अशोकधाम महोत्सव’ को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया। क्षेत्रीय सांसद व केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) तथा उप मुख्यमंत्री सह स्थानीय विधायक विजय कुमार सिन्हा के प्रयासों से इस तीर्थ स्थल का कायाकल्प किया जा रहा है।

वर्तमान में मंदिर के समीप करीब 14 करोड़ रुपये की भारी लागत से आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के पुष्करिणी तालाब की तर्ज पर आधुनिक ‘शिवगंगा’ का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। शिवलिंग के प्रकटीकरण के जल्द ही 50 वर्ष (स्वर्ण जयंती) पूरे होने जा रहे हैं, जिसे लेकर प्रशासन और ट्रस्ट इसे बाबा बैद्यनाथ धाम की तर्ज पर विकसित करने में जुटा हुआ है।

सावन में उमड़ता है जनसैलाब, आज के हादसे ने झकझोरा

महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां प्रतिदिन लाखों कांवड़िए गंगाजल लेकर जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। खासकर सावन के सोमवार को मंदिर में पैर रखने की जगह नहीं होती। आज सावन के पावन अवसर पर उमड़ी इसी भारी भीड़ के अनियंत्रित होने से यह बड़ा हादसा हो गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

घटना पर एक नजर

सावन के तीसरे सोमवार की तड़के श्री इंद्रदमनेश्वर अशोकधाम मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का उत्साह एक भीषण त्रासदी में तब्दील हो गया। मंदिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार और अशोकधाम स्टेशन को जोड़ने वाले मार्ग पर अनियंत्रित भीड़ के दबाव से अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें दबकर सात महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 24 अन्य जख्मी हो गए। सभी घायलों में से 19 को लखीसराय सदर अस्पताल और 5 को स्थानीय निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। जान गंवाने वाली महिलाएं लखीसराय, मुंगेर तथा पटना जिले की निवासी थीं।

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