झंझारपुर में मधुश्रावणी पर्व के अवसर पर ‘मिथिला हाट’ में भव्य ‘डाली सज्जा प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। नवविवाहिताओं ने अपने अनोखे कला कौशल के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया।
प्रतियोगिता की शानदार शुरुआत
शुक्रवार को प्रतियोगिता का आगाज़ उत्साह और पारंपरिक रंगों के साथ हुआ। मिथिला के विभिन्न गाँवों से पहुँची नवविवाहिताओं ने अपनी रचनात्मक सोच, कलात्मक प्रतिभा और पारंपरिक सजावट से सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपनी कला के जरिए मिथिला की समृद्ध लोक परंपरा की खूबसूरत झलक पेश की।
प्रमुख प्रतिभागियों में लोहना की आँचल झा, अंधराठाढ़ी की संजना मिश्रा व कामिनी झा तथा महिनाथपुर की रक्षा झा, शिवानी कुमारी और चंदा झा शामिल रहीं।
प्रतिभागियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
प्रतियोगिता में अलग-अलग क्षेत्रों से आई प्रतिभागियों ने अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन किया। बिस्फी की प्रिया ठाकुर, रुद्रपुर की मुस्कान झा, दुर्गा झा, साक्षी झा, स्वाति मिश्रा, याचना कुमारी और नैना मिश्रा सहित कई प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा से कार्यक्रम को खास बनाया।
सिमरा की श्वेता किरण, हर्षिता कर्ण व श्रुति दास, रैयाम की जूली झा, अररिया रघुनंदनपुर की चांदनी झा, गोधनपुर की अंजली झा, बेलारही की रूपम कुमारी तथा रहिका की ज्योति झा ने आकर्षक सजी डालियों के माध्यम से मिथिला की पारंपरिक कला और संस्कृति को जीवंत रूप दिया।
नई पीढ़ी को मिथिला की परंपरा से जोड़ना है उद्देश्य
3 अगस्त से शुरू हुई यह प्रतियोगिता 14 अगस्त तक चलेगी। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य नई पीढ़ी में मिथिला के पारंपरिक पर्वों, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि बढ़ाना है।
प्रतिभागियों द्वारा सजाई गई आकर्षक डालियाँ न केवल पर्यटकों और श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं, बल्कि मिथिला की कला, परंपरा और रचनात्मकता की खूबसूरती को भी सामने ला रही हैं।
मिथिला की परंपरा जब नई पीढ़ी की रचनात्मकता से मिलती है, तो संस्कृति सिर्फ सहेजी नहीं जाती—वह नए रंगों में आगे बढ़ती है।

