मिथिला: आज 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा से जुड़ा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहती है।
मिथिला सहित बिहार के कई क्षेत्रों में अनंत पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करते हुए भगवान अनंत की पूजा-अर्चना करते हैं। घरों में पूजा की तैयारी की जाती है और विधि-विधान से अनंत भगवान का स्मरण किया जाता है।
अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा
अनंत पूजा की प्रमुख परंपराओं में अनंत सूत्र धारण करना शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं। पूजा के बाद श्रद्धालु इसे धारण करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगल की कामना करते हैं।
मिथिला के कई परिवारों में इस दिन विशेष पूजा-पाठ के साथ पारंपरिक व्यंजन और प्रसाद भी तैयार किए जाते हैं। परिवार के लोग एक साथ पूजा में शामिल होकर अनंत देव से सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।
भगवान विष्णु के अनंत रूप की होती है पूजा
अनंत चतुर्दशी को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत और पूजा के माध्यम से भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं। पूजा में फूल, फल, दीप और अन्य सामग्री अर्पित करने के साथ अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा निभाई जाती है।
गणेश विसर्जन से भी जुड़ा है आज का दिन
अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश उत्सव के समापन से भी जुड़ा है। देश के कई हिस्सों में आज गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस तरह एक ओर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा होती है, वहीं दूसरी ओर गणेश उत्सव का समापन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है।
सुख-शांति और समृद्धि की कामना
अनंत पूजा के अवसर पर श्रद्धालु अपने परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। मिथिला में भी इस पर्व को पारिवारिक आस्था और परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। घर-परिवार के लोग पूजा में शामिल होकर अनंत देव का आशीर्वाद लेने की प्रार्थना करते हैं।
अनंत चतुर्दशी के इस पावन अवसर पर मिथिला सहित देशभर के श्रद्धालुओं को अनंत पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏🌸
