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भारतीय क्रिकेट के स्टाइलिश बल्लेबाज संदीप पाटिल ने मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से खूब नाम कमाया. 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे पाटिल ने क्रिकेट के बाद एक्टिंग में भी हाथ आजमाया और फिर कोच के रूप में अपनी पहचान बनाई. जानें उनके क्रिकेट से फिल्मों और कोचिंग तक के दिलचस्प सफर की कहानी.

Happy Birthday Sandeep Patil: भारतीय क्रिकेट में कुछ खिलाड़ी ऐसे रहे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ उनके आंकड़ों से नहीं बल्कि उनके अंदाज से बनी. संदीप पाटिल भी ऐसे ही क्रिकेटर रहे. स्टाइलिश बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ रवैया और मैदान के बाहर भी कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग पहचान दी. क्रिकेट खेलने के बाद उन्होंने फिल्मों में हाथ आजमाया और फिर कोच के रूप में भी अपनी पहचान बनाई.

18 अगस्त 1956 को बॉम्बे में जन्मे पाटिल को क्रिकेट विरासत में मिला था. उनके पिता मधुसूदन पाटिल भी मुंबई के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके थे. संदीप ने आगे चलकर भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर को मजबूती दी. बल्लेबाजी उनकी सबसे बड़ी ताकत थी, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह मीडियम पेस गेंदबाजी भी कर लेते थे. आज 18 अगस्त 2026 को 70वां जन्मदिन मना रहे हैं.

पाकिस्तान के खिलाफ शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर

संदीप पाटिल ने 15 जनवरी 1980 को पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा. इसके बाद उसी साल 6 दिसंबर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया. भारत के लिए उन्होंने 29 टेस्ट मैच खेले और 36.93 की औसत से 1,588 रन बनाए. उनके नाम चार टेस्ट शतक भी रहे. वनडे में पाटिल ने 45 मैचों में 1,005 रन बनाए, जिसमें नौ अर्धशतक शामिल थे. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा और उन्होंने 130 मैचों में 8,156 रन बनाए.

जब बॉब विलिस के एक ओवर में लगा दिए छह चौके

संदीप पाटिल के करियर की सबसे यादगार पारियों में 1982 का मैनचेस्टर टेस्ट खास है. इंग्लैंड के खिलाफ इस मुकाबले में उन्होंने नाबाद 129 रन बनाए थे. इस पारी के दौरान उन्होंने इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज बॉब विलिस के एक ओवर में लगातार छह चौके जड़कर तहलका मचा दिया था. इस ओवर की एक गेंद पर रन नहीं बना, लेकिन उससे पहले विलिस की नो-बॉल पर भी पाटिल ने चौका लगाया था. उनकी यह आक्रामक बल्लेबाजी आज भी भारतीय क्रिकेट के यादगार किस्सों में शामिल है.

1983 विश्व कप जीत में भी निभाई भूमिका

संदीप पाटिल 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 32 रन की उपयोगी पारी खेली और टीम की जीत में योगदान दिया. उस समय भारतीय क्रिकेट के लिए यह विश्व कप जीत ऐतिहासिक बदलाव लेकर आई थी.

क्रिकेट के बाद फिल्मों में भी आजमाया हाथ

क्रिकेट से दूरी बनाने के बाद पाटिल ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी शायद बहुत कम लोगों ने कल्पना की होगी. उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में प्रवेश किया. 1985 में उनकी फिल्म ‘कभी अजनबी थे’ रिलीज हुई. इस फिल्म में उनके साथ पूनम ढिल्लों और देबश्री रॉय नजर आई थीं. हालांकि, यह उनका पहला और आखिरी फिल्म प्रोजेक्ट साबित हुआ और इसके बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली.

कोच बनकर फिर बनाई पहचान

पाटिल का क्रिकेट से रिश्ता यहीं खत्म नहीं हुआ. उन्होंने कोचिंग को अपना अगला पड़ाव बनाया. नवंबर 1996 में उन्हें केन्या की राष्ट्रीय टीम का कोच बनाया गया. उनके मार्गदर्शन में केन्याई क्रिकेट ने नई पहचान हासिल की. 2003 वनडे विश्व कप में केन्या ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया. हालांकि, सेमीफाइनल में उसे भारत के हाथों 91 रन से हार मिली. पाटिल बाद में ओमान क्रिकेट टीम और भारत-ए के साथ भी कोच के रूप में जुड़े.

चयन समिति के प्रमुख भी रहे

संदीप पाटिल ने प्रशासनिक (Administrative) भूमिका भी निभाई. दिसंबर 2012 से सितंबर 2016 तक उन्होंने बीसीसीआई की सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष के तौर पर काम किया. उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता. यानी खिलाड़ी, विश्व कप विजेता, अभिनेता, कोच और चयनकर्ता, संदीप पाटिल ने क्रिकेट से जुड़े लगभग हर बड़े किरदार को अपनी जिंदगी में जिया.

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