Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज 14 सितंबर को यनी आद मनाई जा रही है. जानें भगवान शिव-पार्वती की पूजा विधि, व्रत कथा और शुभ मुहूर्त के खास अपडेट.
Hartalika Teej 2026 Mantra: हरतालिका तीज पर करें शिव-पार्वती के इन मंत्रों का जाप
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इस दिन पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. ऐसे में यहां माता पार्वती और भगवान शिव के कुछ मंत्र बताए गए हैं, जिनका जाप आज किया जा सकता है. साथ ही, मंत्र जाप से जुड़े कुछ नियमों के बारे में भी बताया गया है.
माता पार्वती के मंत्र
- ॐ उमायै नमः।
- ॐ पार्वत्यै नमः।
- ॐ जगद्धात्र्यै नमः।
भगवान शिव के मंत्र
- ॐ नमः शिवाय।
- ॐ महेश्वराय नमः।
- ॐ शंभवे नमः।
- ॐ पशुपतये नमः।
Hartalika Teej 2026 Aarti: हरतालिका तीज माता पार्वती की आरती
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता। ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल सदा दाता॥ जय पार्वती माता, जय पार्वती माता॥
अरि-कुल पद्म विनाशिनी, जय सेवक त्राता। जग जीवन जगदंबा, हरिहर गुण गाता॥ जय पार्वती माता॥
सिंह को वाहन साजे, कुंडल हैं साथा। देव वधू जहाँ गावत, नृत्य करत ताथा॥ जय पार्वती माता॥
सतयुग शील सुसुंदर, नाम सती कहलाता। हेमाचल घर जन्मी, सखियन संग रंगराता॥ जय पार्वती माता॥
शुंभ-निशुंभ विदारे, हेमाचल स्याता। सहस भुजा तनु धरिके, चक्र लियो हाथा॥ जय पार्वती माता॥
सृष्टि रूप तू ही जननी, शिव संग रंगराता। नंदी-भृंगी बीन बजावें, सारा मदमाता॥ जय पार्वती माता॥
देवन अरज करत हम, चित को लाता। गावत दे-दे ताली, मन में रंगराता॥ जय पार्वती माता॥
श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता। सदा सुखी रहता, सुख-संपत्ति पाता॥ जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता॥
Hartalika Teej 2026 Live: महिलाएं क्यों करती हैं हरतालिका तीज का व्रत?
हरतालिका तीज पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं. वहीं, कुंवारी लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं. इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है.
Hartalika Teej 2026 Puja Samagri: हरतालिका तीज पूजा सामग्री
- बालू या काली मिट्टी (मूर्ति बनाने के लिए)
- बेलपत्र, शमी के पत्ते, धतूरा के फूल और आक के पत्ते
- केला आम और अशोक का पत्ता
- तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश
- माता पार्वती के लिए लाल चुनरी
- भगवान शिव के लिए वस्त्र
सोलह श्रृंगार सामग्री
- सुहाग का सामान
- सिंदूर
- महावर (आलता)
- मेहंदी
- चूड़ी या लहठी
- बिंदी
- काजल
- कंघी
- आइना
- बिछिया
- पायल
- मेहंदी,
- महरून या लाल रंग की नई साड़ी
- नाक की लौंग
- मंगलसूत्र
पूजन के लिए सामग्री
- रोली
- अक्षत
- कलावा (मौली)
- धूप
- कपूर
- दीपक और घी
- तिल का तेल
- रुई
- माचिस
- गंगाजल
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और शहद)
- फल
- मिठाई
- गुड़ा बना पकवान
Hartalika Teej Nirjala Vrat Vidhi: हरतालिका तीज का व्रत कैसे रखें, पूजा का तरीका क्या है
सूर्योदय के साथ ही हरतालिका तीज का निर्जल व्रत शुरू हो जाता है. ऐसे में सुबह जल्दी उठकर फ्रेश हो जाएं और स्नान करें.
लाल या पीले रंग का नया वस्त्र पहनकर निर्जल या फलाहार व्रत का मानसिक (मन से) संकल्प लें.
रेतीली या चिकनी मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं.
चौकोर चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाकर उस पर कलश (मिट्टी या पीतल का) रखें.
शिवजी को बेलपत्र, आक के फूल और धतूरा इत्यादि चढ़ाएं. इसके बाद माता पार्वती को सुहाग 16 श्रृंगार की सामग्रियां (लहठी, चूड़ी, बिंदी इत्यादि अर्पित करें.
हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ करें या सुनें. इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव की आरती करें.
अगर दिन पूजा न कर सकें, तो शाम के समय (प्रदोष काल) में विधि-विधान से पूजा और आरती करें. व्रत कथा का पाठ करें.
हरतालिका व्रत नियम के अनुसार दिन में सोने से बचना चाहिए. व्रत के दौरान रात में जागकर भजन करना शुभ माना गया है.
दूसरे दिन सुबह पूजा-पाठ और आरती करके सुहाग की सामग्री का दान करें. इसके बाद व्रत का पारण करें.
Hartalika Teej 2026 Shiv Parvati Puja Muhurat: इस समय करें शिव-पार्वती की पूजा
पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज पर आज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह में 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगा. जबकि शाम यानी प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा के लिए शुभ समय 5 बजकर 09 मिनट से 6 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट मिनट पहले शुरू होता है जबकि सूर्यास्त के 45 मिनट बाद समाप्त होता है. रांची में सूर्यास्त शाम लगभग 5 बजकर 54 मिनट पर होगा. मिथिला पंचांग के अनुसार, सूर्यास्त 06 बजकर 07 मिनट पर होगा. हालांकि, स्थानीय समय के अनुसार सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है.
Hartalika Teej 2026 Muhurat: हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त
हरतालिका तीज पर आज सुबह की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक है. मिथिला पंचांग के अनुसार सूर्योदय आज सूर्योदय 5:53 बजे है जबकि सूर्यास्त का समय 6:07 बजे है.
मिथिला पंचांग बिहार-झारखंड में मान्य है लेकिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.
रांची, जमशेदपुर, पटना और गया में सूर्योदय का समय
| शहर | सूर्योदय | |
| रांची | 5:33 से 5:34 के बीच | |
| जमशेदपुर | 5:26 बजे | |
| पटना | 5:34 बजे | |
| गया | 5:34 बजे |
Hartila Teej Vrat Eating Rule: फलाहार व्रत में क्या खाएं
हरतालिका तीज के दिन फलाहार व्रत करने की परंपरा भी है. फलाहारी व्रत में सेब, केला, अनार अमरूद इत्यादि का सेवन किया जा सकता है.
ड्राई फ्रूट्स के तौर पर मखाना, बादाम, अखरोट, सिंहाड़ा, काजू, किशमिश लिया जा सकता है.
जबकि डेयरी उत्पादों में दूध, दही, छाछ या पनीर खाया जा सकता है. इसके अलावा साबूदाना या सिंहाड़े के आटे से बनी चीजें भी ली जा सकती हैं.
Hartalika Teej 2026 Puja Muhurat: हरतालिका तीज की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा प्रदोष में पूजा के लिए शुभ समय शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा. पंडित मणिभूषण झा ने मिथिला और महावीर पंचांग के हलावे से बताया कि अगर किसी वजह से सुबह में पूजा नहीं हो पाए, तो प्रदोष काल में पूजन किया जा सकता है.
Hartalika Teej 2026 Puja Vidhi: हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं कैसे करें पूजा? आसान विधि
सुबह स्नान करके नए वस्त्र पहनें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का संकल्प लें.
सोलह श्रृंगार करके हाथ में जल या गंगाजल लेकर अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जल व्रत का संकल्प लें.
एक छोटी चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं.
मिट्टी या सफेद बलुई मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाएं.
मूर्तियों को स्थापित करने के बाद कलश की स्थापना करें.
षोडषोचार, पंचोपचार या जो बन सके उस विधि से भगवान गणेश की पूजा करें.
भगवान शिव को जल, पंचामृत, बेलपत्र, भस्म, जनेऊ, धतूरा, आक का पत्ता इत्यादि पूजन सामग्रियां अर्पित करें.
माता पार्वती को रोली, फूल, अक्षत इत्यादि अर्पित करें. इसके साथ ही 16 श्रृंगार का सामान जैसे- बिंदी, सिंदूर, मेहंदी इत्यादि भी चढ़ाएं. इसके बाद माता पार्वती की मूर्ति से सिंदूर लेकर पांच बार अपनी मांग में भरें.
हरितालिका तीज की कथा सुने या पढ़ें. कथा समाप्त होने के बाद कपूर से आरती करें. आरती, माता पार्वती के साथ-साथ भोलेनाथ की भी करें.
अगले दिन यानी 14 सितंबर को सुबह मुहूर्त देखकर व्रत का पारण करें. इसके बाद सुहाग की सामग्रियां किसी सुहागन महिला या ब्राह्मणी (ब्राह्मण की पत्नी) को दें. अगर पूजन के बाद पंडित जी आपको अपने हाथों सुहाग की सामग्री दें, तो उसे सम्मान से रख लेना चाहिए.
Hartalika Teej Vrat Katha: हरतालिका तीज व्रत कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक सती ने पूर्वजन्म में राजा दक्ष के घर उनकी सबसे छोटी पुत्री के रूप में जन्म लिया था. कहा जाता है कि सती ने अपने पिता दक्ष की इच्छा के विरुद्ध जाकर महादेव से विवाह कर लिया. जब दक्ष के घर यज्ञ में आमंत्रण नहीं मिला, तो माता सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने शरीर का त्याग कर दिया.
इस घटना के बाद सती का दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय के यहां पार्वती के रूप में हुआ. देवी पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या शुरू कर दी. कहा जाता है कि पार्वती जी की कठिन तपस्या के बारे में हिमालय को पता चला, तो वे बहुत चिंतित हो गए.
दूसरी ओर, नारद जी पार्वती के विवाह का प्रस्ताव लेकर पर्वतराज हिमालय के पास पहुंचे. नारद जी के प्रस्ताव को हिमालय ने स्वीकार कर लिया. जब माता पार्वती को इस बात की जानकारी हुई, तो वह बहुत दुखी रहने लगी. उन्होंने इस घटना को अपने सहेलियों के बीच रखा. इसके बाद उनकी सखियां उन्हें लेकर गुफा में चली गईं.
गुफा में माता पार्वती रेत का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दी. पार्वती की कठोर तपस्या से महादेव प्रसन्न हुए और उनसे वर मांगने को कहा. माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि वे उन्हें अपना पति स्वीकार करना चाहती हैं. तब भगवान शिव ने पार्वती को अपना अर्धांगिनी यानी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया.
Hartalika Teej 2026 Puja Samagri: हरतालिका तीज पूजा का सामान, देखें लिस्ट
- बालू या मिट्टी से बनी शिव गणेश जी, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति
- सुहाग का सामान (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और श्रृंगार की दूसरी वस्तुएं)
- अगरबत्ती या धूपबत्ती
- फल और मिठाइयां
- खीर और हलवा
- भिगोए हुए चने
- रोली
- चावल
- कपूर
- एक चौकी या आसन
- मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते
- फूलों की माला और फूल
- पान के पत्ते और सुपारी
- कच्चा सूत
- पूजा के लिए कलश
- जल और गंगाजल
- पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी
- नारियल (एक)
- दूर्वा (घास)
- बेलपत्र
- शमी पत्र
- कच्ची हल्दी की गांठें
- गेहूं या चावल
- रुई
- माचिस
- मौली
- हल्दी
- चंदन
- घी का दीपक
Hartalika Teej 2026 Live: कैसे रखें निर्जल व्रत, जानें पूजा का तरीका
हरतालिका तीज पर निर्जल (बिना पानी के) व्रत रखने की परंपरा है. ऐसे में कल यानी 14 सितंबर को सुबह उठकर नहाकर पवित्र हो जाएं. इसके बाद माता पार्वती और शिवजी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. दिन भर बिना जल पिए शिव-पार्वती का पूजन करें. इसके अलावा प्रदोष काल (शाम का समय) भगवन शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की रेत, बालू या मिट्टी से मूर्ति बनाएं. साथ ही विधि-विधान से उनकी पूजा करें.
हरतालिका तीज व्रत के दौरान सोया नहीं जाता है. व्रत के दौरान रात में भी न सोने की परंपरा है. इसलिए रात में जागकर भजन-कीर्तन या माता पार्वती और भगवान शिव के नामों का जाप करना चाहिए. व्रत के अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है. व्रत का पारण अगले दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद ही करना चाहिए. हालांकि, अगर सेहत से जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी है, तो इस स्थिति में स्वास्थ्य का ध्यान रखें. अस्वस्थ रहने पर व्रत करना अनिवार्य नहीं माना गया है.
Hartalika Teej 2026 Live: भाद्रपद तृतीया तिथि शुरू, व्रत-पूजन के लिए शुभ मुहूर्त जानिए
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है. महिलाएं और कुंवारी कन्याएं अपनी-अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए निर्जल व्रत रखती हैं. पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 08 मिनट से शुरू हो चुकी है.
जबकि, इस तिथि की समाप्ति 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर होगी. मिथिला, महावीर और द्रिक पंचांग के अनुसार व्रत सोमवार, 14 सितंबर को रखा जाएगा. पूजन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 07 बजकर 06 मिनट तक रहेगा.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज पर रात के समय सोना चाहिए या नहीं?
हरतालिका तीज व्रत के दिन व्रती को सोना नहीं चाहिए. इस दिन रात के समय में व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा सुननी या पढ़नी चाहिए. साथ ही भजन गाने या सुनने चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से मन शांत रहता है और नकारात्मक विचारों से बचने में मदद मिलती है.
Hartalika Teej 2026 Live: पीरियड्स में हरतालिका तीज का व्रत कर सकते हैं या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीरियड्स के दौरान भी हरतालिका तीज का व्रत रखा जा सकता है. हालांकि, इस दौरान पूजा-पाठ से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है. पीरियड्स में भगवान की मूर्ति या तस्वीर को छूने से बचना चाहिए. साथ ही, पूजा की सामग्री को भी छूने से परहेज करना चाहिए.
Hartalika Teej 2026 Live: शादी के बाद पहली तीज पर मायके से क्या आता है?
विवाह के बाद पहली हरतालिका तीज पर मायके से बेटी के लिए साड़ी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, मिठाई, फल और अन्य श्रृंगार सामग्री भेजने की कई परिवारों में परंपरा है. इसे बेटी के प्रति मायके के स्नेह, आशीर्वाद और शुभकामनाओं से जोड़कर देखा जाता है. इस उपहार को सिंधारा कहा जाता है. हालांकि, सिंधारा में शामिल सामग्री की कोई एक तय सूची नहीं है. अलग-अलग राज्यों और परिवारों में रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज पर क्या नहीं करें ?
हरतालिका तीज के व्रत में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. इस दिन काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें. व्रत के दौरान गुस्सा, विवाद और तामसिक भोजन से दूर रहें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, तीज की रात जागरण करना शुभ माना जाता है, इसलिए रात में सोने से बचना चाहिए.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा कैसे बनाएं?
हरतालिका तीज पर पूजा के लिए साफ मिट्टी या बालू लें. स्नान करने के बाद मिट्टी को अच्छी तरह साफ कर लें. इसमें जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी या गंगाजल मिलाकर नरम कर लें. इसके बाद हाथों से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं. प्रतिमा को सही आकार देने के लिए हाथों का इस्तेमाल करें.
प्रतिमा तैयार होने के बाद उसे थोड़ी देर सूखने दें. इसके बाद लकड़ी की चौकी पर केले के पत्ते बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. प्रतिमा स्थापित करने के बाद विधि-विधान से पूजा करें.
Hartalika Teej 2026 Live: कब और कैसे करें हरतालिका तीज व्रत का पारण?
हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा और इसका पारण 15 सितंबर की सुबह पूजा के बाद किया जाएगा. व्रती महिलाएं सुबह स्नान करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. पूजा और आरती के बाद पहले जल ग्रहण करके व्रत खोलें. इसके बाद प्रसाद लेकर हल्का और सात्विक भोजन करें.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से क्यों बनाई जाती है शिव-पार्वती की प्रतिमा?
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता राजा हिमवान उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे. जब माता पार्वती को यह बात पता चली, तो उनकी सखियों ने उन्हें एक घने जंगल में छिपा दिया.
जंगल की गुफा में माता पार्वती के पास पूजा के लिए कोई मूर्ति नहीं थी. उन्होंने नदी तट की बालू एकत्रित कर अपने हाथों से शिवलिंग का स्वरूप बनाया. इसी बालू से बने शिवलिंग की कठोर साधना और निर्जला तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया. यही कारण है कि आज भी महिलाएं माता पार्वती के उसी संकल्प को याद करते हुए मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाती हैं.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ, पहले किसकी पूजा करें?
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी इस बार एक ही दिन पड़ रही हैं. पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर को तृतीया तिथि सुबह 7:06 बजे तक रहेगी, जबकि इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी.
हरतालिका तीज की पूजा तृतीया तिथि में प्रातःकाल करने का विधान है, वहीं गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना और पूजा मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि के दौरान की जाती है. इसलिए हरतालिका तीज की पूजा की जाएगी. इसके बाद गणेश चतुर्थी की पूजा की जाएगी.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती को क्या चढ़ाएं?
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती को श्रद्धा से फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत और भोग अर्पित किया जाता है.
माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और चुनरी चढ़ाने की परंपरा है.
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं. इसके अलावा पंचामृत से अभिषेक कर शिव-पार्वती को मिठाई और मौसमी फल अर्पित किए जा सकते हैं.
Hartalika Teej 2026 Live: सुहागिन महिलाएं ऐसे करें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं.
- पूजा के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या मिट्टी से बनी प्रतिमा स्थापित करें.
- भगवान शिव को जल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें.
- माता पार्वती को कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, फूल और सुहाग की सामग्री चढ़ाएं.
- भगवान को मिठाई और फल का भोग लगाएं.
- इसके बाद धूप-दीप जलाएं और हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें.
- अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज पर क्यों रखा जाता है निर्जला व्रत? जानें कथा
हरतालिका तीज के निर्जला व्रत का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने वन में रहकर घोर तप किया था. उन्होंने इस दौरान भोजन और पानी दोनों का त्याग कर दिया था. भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा की. उन्होंने पूरी रात जागकर शिव आराधना की.
माता पार्वती की तपस्या और उनकी अटूट भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए. उन्होंने माता पार्वती को दर्शन देकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती के इसी कठिन तप, त्याग और संकल्प की याद में हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है. महिलाएं इस व्रत के माध्यम से माता पार्वती से अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज का नाम कैसे पड़ा ‘हरतालिका’?
‘हरतालिका’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है – ‘हरत’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ मतलब सखी. पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर रहे थे. जब माता पार्वती ने अपनी व्यथा सहेलियों को बताई, तो सखियां उनका हरण कर उन्हें एक घने वन की गुफा में ले गईं. सखियों द्वारा हरण किए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज व्रत पूजन सामग्री
हरतालिका तीज की पूजा के लिए सबसे पहले सुहाग का पिटारा तैयार करें. इसमें सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और काजल रखें. पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित करने के लिए फूल, आक के फूल, मंजरी, शमी पत्र, तुलसी, केले का पत्ता, फल, नारियल, कुमकुम, चंदन और अबीर रखें. इसके साथ जनेऊ, वस्त्र, माता की चुनरी, पीला कपड़ा, लकड़ी का पाटा, दीपक, घी और तेल भी पूजा सामग्री में शामिल करें.
Hartalika Teej 2026 Live: दिन में कब-कब कर सकते हैं पूजन
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा सुबह और शाम दोनों वक्त की जा सकती है. सुबह की पूजा सबसे अच्छी मानी गई है. अगर सुबह में पूजन करना संभव न हो सके, तो शाम में प्रदोष काल (शाम का खास समय) के दौरान भी पूजा की जा सकती है.
Hartalika Teej 2026 Live: बिहार-झारखंड के लिए हरतालिका तीज की पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 14 सितंबर, सोमवार को सुबह 5:35 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा. इस साल पूजन के लिए 1 घंटा 32 मिनट का समय मिलेगा. मिथिला पंचांग के अनुसार, यह शुभ मुहूर्त झारखंड और बिहार के लिए मान्य है.
Hartalika Teej 2026 Live: क्यों रखा जाता है हरतालिका तीज व्रत?
धार्मिक परंपरा के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति, खुशहाल वैवाहिक जीवन, दीर्घायु और स्वस्थ संतान की कामना के रखा जाता है. मान्यतानुसार, इस व्रत को महिला और कुंवारी लड़कियां भी रख सकती हैं. कुंवारी कन्या सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त करने की कामना से व्रत और पूजन करती हैं. जबकि महिलाएं खुशहाल दांपत्य जीवन और संतान प्राप्त की कामना के लिए रखती हैं.
Hartalika Teej 2026 Live: हरतालिका तीज कब है?
हरतालिका तीज का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से इस दिन निर्जल व्रत रखती हैं. वहीं, कई कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं. तीज के दिन सोलह श्रृंगार कर शिव-पार्वती की आराधना का खास महत्व माना है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सबसे पहले यह व्रत किया था. यहां पढ़ें हरतालिका तीज से जुड़े पूजा, व्रत, शुभ मुहूर्त और दिनभर के सभी ताजा अपडेट.
