Success Story: चौतरवा पतिलार गांव मुजफ्फरपुर की रहने वाली सिद्धि रानी ने सफलता की नई मिसाल पेश की है. सिद्धि के पिता और दादा दोनों शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं. अब उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर का पद हासिल करके परिवार का मान बढ़ाया है. उन्होंने अपनी स्ट्रैटजी और तैयारी के बारे में बताया.
Success Story: पश्चिम चंपारण जिले के चौतरवा पतिलार गांव की रहने वाली सिद्धि रानी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. साधारण परिवार से आने वाली सिद्धि रानी का चयन मुजफ्फरपुर की यूनिवर्सिटी में सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) के पद पर हुआ है. उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल है. सिद्धि को उनके पुराने स्कूल में बुलाकर सम्मानित भी किया गया.
दादा और पापा दोनों शिक्षा जगत से जुड़े हैं
सिद्धि रानी के परिवार का शिक्षा से गहरा जुड़ाव रहा है. दादा से लेकर पिता और अब सिद्धि सभी एजुकेशनल सेक्टर से जुड़े हुए हैं. सिद्धि के दादा कृष्णनाथ तिवारी सेवानिवृत प्रधानाध्यापक (Retired Head Master) रहे हैं. उनके पिता अजय कुमार तिवारी भी टीचर हैं और मां हाउस वाइफ हैं. सिद्धि की मां ने उन्हें पढ़ने के लिए और करियर बनाने के लिए हमेशा मोटिवेट किया है.

परिवार और शिक्षकों को दिया सफलता का क्रेडिट
सिद्धि ने कहा कि उनकी इस सफलता का क्रेडिट उनके माता-पिता और शिक्षकों को जाता है. सिद्धि के दादा जोकि खुद रिटायर शिक्षक हैं, उन्होंने सिद्धि को हमेशा सपोर्ट किया.
नेट परीक्षा के लिए मामा ने भांजी को किया गाइड
सिद्धि रानी बताती हैं कि परिवार के सभी सदस्य ने उन्हें काफी मोटिव और सपोर्ट किया. हालांकि, उनकी सफलता में मामा का खास रोल है. उन्होंने कहा कि मामा ने उन्हें हर कदम पर गाइड किया है.
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से शुरू हुई शिक्षा यात्रा
गांव के शिक्षा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से सिद्धि की शुरुआती पढ़ाई हुई. इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से हिंदी साहित्य में ग्रेजुएशन किया इसके बाद उन्होंने DU से ही पोस्ट ग्रेजुएशन किया.

हर दिन 5-6 घंटे करती थी पढ़ाई
शिक्षक के प्रति ललक और मेहनत के दम पर सिद्धि ने NET JRF क्वालिफाई किया और अब बिहार में Assistant Professor बन गईं. वे बताती हैं कि उन्होंने पढ़ाई का कोई फिक्स टाइम नहीं रखा. ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन तो आम स्टूडेंट की तरह 3-4 घंटे पढ़ती थी. NET JRF के लिए दिन में 5-6 घंटे पढ़ाई करती थी. सिद्धि ने कहा कि पढ़ाई के लिए कभी घंटे फिक्स नहीं किए. लेकिन जितना ही देर पढ़ती थी, कॉन्सट्रेशन के साथ पढ़ाई करती थी.
