सौराठ (मधुबनी): मिथिलाक समृद्ध लोककला परंपराकेँ नव आयाम देबाक दिशामे मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठमे छात्र-छात्रासभ द्वारा तैयार कलाकृतिक विशेष प्रदर्शनी आयोजित कयल गेल। एहि प्रदर्शनीमे पारंपरिक मिथिला चित्रकलाक विभिन्न शैलीक संग आधुनिक प्रयोगक सेहो प्रदर्शन कयल गेल। बिहार सरकारक कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा संचालित आ आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालयसँ संबद्ध एहि संस्थानमे आयोजित प्रदर्शनी तीन वर्षीय ‘बैचलर इन मिथिला फोक पेंटिंग’ डिग्री कोर्स (सत्र 2025–28) केर दोसर सेमेस्टरक विद्यार्थीसभक व्यावहारिक पाठ्यक्रमक हिस्सा छल।
प्रदर्शनीमे विद्यार्थीसभ अपन छह मासक अभ्यास आ रचनात्मक कार्यक माध्यमसँ मिथिला चित्रकलाक विविध रूप प्रस्तुत कयलनि। एहि कलाकृतिमे पारंपरिक शैलीक बारीकीक संग छात्र-छात्रासभक रचनात्मक सोच सेहो देखय लेल भेटल।
कचनी, भरनी आ गोदना शैलीमे देखल गेल कलाकारी
प्रदर्शनीमे मिथिला चित्रकलाक विभिन्न पारंपरिक शैलीकेँ आकर्षक ढंगसँ प्रस्तुत कयल गेल।
- कचनी शैली: बारीक रेखांकन आ सूक्ष्म कलात्मक विवरणसँ सुसज्जित चित्र प्रदर्शित कयल गेल।
- भरनी शैली: चमकदार रंग आ आकर्षक संयोजनसँ तैयार चित्रसभ दर्शकक ध्यान आकर्षित कयलक।
- गोदना चित्रकला: लोकजीवन आ पारंपरिक गोदना शैलीसँ जुड़ल प्रतीकसभकेँ आधुनिक कैनवासपर उकेरल गेल।
- गोबरक पारंपरिक प्रयोग: चित्र बनयबाक आधार आ कैनवास तैयार करबामे गोबरक पारंपरिक लेपक कलात्मक उपयोग देखाओल गेल।
- उपयोगी कलाकृति: विद्यार्थीसभ दैनिक जीवन आ विभिन्न उत्सवमे उपयोग होयवला वस्तुसभपर सेहो मिथिला चित्रकलाक प्रयोग कयलनि।
एहि प्रदर्शनीक माध्यमसँ पारंपरिक कलाक संरक्षण आ ओकर रचनात्मक उपयोगक विभिन्न पहलू सामने आयल।
पद्मश्री कलाकार आ अतिथिसभ कयलनि संयुक्त उद्घाटन
प्रदर्शनीक उद्घाटन संस्थानक निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, वरिष्ठ आचार्य आ पद्मश्री सम्मानसँ सम्मानित बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, आचार्य शिवन पासवान, डॉ. रानी झा आ डिग्री कोर्सक समन्वयक प्रतीक प्रभाकर संयुक्त रूपसँ कयलनि।
उद्घाटनक बाद अतिथिसभ प्रदर्शनीमे राखल गेल कलाकृतिक अवलोकन कयलनि आ युवा चित्रकारसभक कलात्मक प्रयासक सराहना कयलनि।
गुरु-शिष्य परंपरा आ नियमित अभ्याससँ निखरत प्रतिभा
संस्थानक निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह कहलनि जे वरिष्ठ आचार्यसभक मार्गदर्शनमे विद्यार्थीसभ कम समयमे मिथिला चित्रकलाक विभिन्न बारीकीकेँ गहराइए सँ बुझबाक प्रयास कयलनि। ओ छात्र-छात्रासभकेँ नियमित अभ्यास करबाक आ नव प्रयोगक माध्यमसँ अपन कला निखारबाक लेल प्रेरित कयलनि।
ओतहि डिग्री कोर्सक समन्वयक प्रतीक प्रभाकर कहलनि जे एहि तरहक प्रदर्शनी विद्यार्थीसभकेँ अपन कलाकृति सार्वजनिक रूपसँ प्रस्तुत करबाक अवसर दैत अछि। एहन आयोजनसँ भविष्यमे राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय स्तरपर एकल कला प्रदर्शनी आयोजित करबाक लेल हुनका सभमे व्यावहारिक अनुभव आ आत्मविश्वास विकसित होयत।
28 विद्यार्थी अगिला मास तेसर सेमेस्टरमे करताह प्रवेश
सत्र 2025–28 मे एहि डिग्री कोर्समे कुल 28 छात्र-छात्रा अध्ययनरत छथि। दोसर सेमेस्टरक परीक्षा आ व्यावहारिक कार्य पूरा भेलाक बाद विद्यार्थीसभ अगिला मास तेसर सेमेस्टरमे प्रवेश करताह। एहि चरणमे हुनका मिथिला चित्रकलाक उन्नत शैली आ तकनीकक प्रशिक्षण देल जायत।
कार्यक्रममे संस्थानक लेखा पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद यादवक संग शिक्षक, शोधार्थी आ अन्य कर्मचारी उपस्थित रहलाह।
मिथिला चित्रकला संस्थानक एहि प्रदर्शनीमे छात्र-छात्रासभक कलात्मक अभ्यास, पारंपरिक शैलीक प्रति रुचि आ नव प्रयोगक प्रयास देखय लेल भेटल। एहन शैक्षणिक गतिविधि मिथिलाक लोककला परंपराकेँ आगाँ बढ़ेबाक संग नव पीढ़ीकेँ एहि सांस्कृतिक विरासतसँ जोड़यमे योगदान दैत अछि।
