जीविका से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं बढ़ा रहीं आत्मनिर्भरता की राह, केवटी में वार्षिक आमसभा का आयोजन
केवटी: ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें अपने फैसले खुद लेने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में जीविका परियोजना लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में केवटी प्रखंड मुख्यालय परिसर में विकास जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड की वार्षिक आमसभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में महिलाओं की आर्थिक प्रगति, आजीविका के नए अवसर और सामाजिक भागीदारी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) ऋचा गार्गी, बीडीओ कृष्णा कुमारी, बीपीएम समीउल हसन, समिति की अध्यक्ष अनीता देवी, सचिव जूली देवी और कोषाध्यक्ष सोनी देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस दौरान बड़ी संख्या में जीविका से जुड़ी महिलाएं और समिति के सदस्य मौजूद रहे।
बचत और ऋण से आगे बढ़कर महिलाएं बना रहीं अपनी पहचान
आमसभा को संबोधित करते हुए डीपीएम ऋचा गार्गी ने कहा कि जीविका से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाओं की भूमिका केवल बचत करने या ऋण लेने तक सीमित नहीं रही है। अब महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ आजीविका के नए साधन अपनाने, स्वतंत्र निर्णय लेने और सामाजिक गतिविधियों में नेतृत्व करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि कई जीविका दीदियों ने छोटे स्तर से अपने रोजगार और व्यवसाय की शुरुआत की। अनुभव और सहयोग के साथ इन गतिविधियों को आगे बढ़ाकर उन्होंने अपनी आय के साधनों का विस्तार किया। इसका असर केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव देखने को मिला है।
परिवार की जरूरतों में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
जीविका परियोजना से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक भूमिका बढ़ने से परिवार के कई महत्वपूर्ण फैसलों में भी उनकी भागीदारी मजबूत हुई है। महिलाएं घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों में योगदान दे रही हैं।
आमसभा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आर्थिक रूप से मजबूत महिला परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अपनी आमदनी होने से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे परिवार से जुड़े कई फैसलों में अधिक सक्रिय रूप से अपनी राय रख पाती हैं।
नए रोजगार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
जीविका के माध्यम से महिलाओं को अलग-अलग प्रकार की आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और अवसरों के आधार पर महिलाएं छोटे व्यवसाय और अन्य आयवर्धक गतिविधियां अपना रही हैं।
इन प्रयासों से ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के रास्ते खुल रहे हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
बच्चों की शिक्षा पर भी दिख रहा सकारात्मक असर
कार्यक्रम में बताया गया कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति बेहतर होने का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है। कई परिवार अब बच्चों की पढ़ाई पर पहले की तुलना में अधिक खर्च करने में सक्षम हो रहे हैं।
महिलाओं की आय बढ़ने से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने, बच्चों की बेहतर शिक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिल रहा है।
प्रशासन ने दिया हर संभव सहयोग का भरोसा
बीडीओ कृष्णा कुमारी ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने जीविका दीदियों से सरकारी योजनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी रखने तथा उनका लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं योजनाओं की सही जानकारी हासिल कर उन्हें अपनी आजीविका से जोड़ें, तो उनके लिए आगे बढ़ने के कई अवसर पैदा हो सकते हैं।
महिलाओं के अनुभव और उपलब्धियों पर हुई चर्चा
वार्षिक आमसभा के दौरान जीविका से जुड़ी महिलाओं की गतिविधियों और अब तक की उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें आगे भी नए क्षेत्रों में काम करने और अपनी आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुख रूप से सामने आया कि ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति में बदलाव नहीं लाता, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय की प्रगति में योगदान देता है। जीविका से जुड़ी महिलाएं बचत और ऋण की व्यवस्था से आगे बढ़कर रोजगार, आर्थिक निर्णय और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
