दरभंगा में बच्चों के इलाज में एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल पर कार्यशाला, 68 डॉक्टर हुए शामिल
दरभंगा: बच्चों के इलाज में एंटीबायोटिक दवाओं के उचित और सोच-समझकर इस्तेमाल को लेकर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP), दरभंगा शाखा की ओर से शनिवार को ‘स्ट्राइक एंटीबायोटिक्स टी-20’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दरभंगा समेत पटना, मधुबनी और समस्तीपुर के कुल 68 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. रवि प्रकाश ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में बिहार IAP के अध्यक्ष डॉ. निगम प्रकाश नारायण, IAP कार्यकारिणी सदस्य डॉ. रश्मि अग्रवाल और डॉ. अनिल कुमार सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।
हर संक्रमण में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं
उद्घाटन सत्र में डॉ. रवि प्रकाश ने बच्चों के उपचार में एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बुखार या संक्रमण की स्थिति में एंटीबायोटिक देना जरूरी नहीं होता। दवा तय करने से पहले बच्चे की बीमारी की गंभीरता, संक्रमण की संभावित प्रकृति और उपलब्ध जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने चिकित्सकों से कार्यशाला में साझा की गई जानकारी को अपने नियमित उपचार में उपयोग करने की अपील की।
अभिभावकों को भी दी जाए पूरी जानकारी
कार्यशाला के शुरुआती सत्र में डॉ. रश्मि अग्रवाल और डॉ. निगम प्रकाश नारायण ने एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल और कार्यक्रम के उद्देश्य पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि दवा लिखने से पहले संक्रमण की स्थिति को समझना जरूरी है।
इसके साथ ही अभिभावकों को यह भी बताया जाना चाहिए कि बच्चे को दवा क्यों दी जा रही है, कितने समय तक इसका इस्तेमाल करना है और किन सावधानियों का पालन करना जरूरी है। आवश्यकता के अनुसार मरीज की दोबारा जांच और समीक्षा पर भी जोर दिया गया।
अलग-अलग संक्रमणों पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
कार्यशाला में चिकित्सकों को बच्चों में होने वाले विभिन्न संक्रमणों से जुड़े मामलों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। पहले सत्र में डॉ. अर्पिता खेमका ने गले, कान, त्वचा तथा हड्डी और जोड़ से संबंधित संक्रमणों पर चर्चा की।
दूसरे सत्र में डॉ. अनिल कुमार ने गंभीर निमोनिया, उपचार के बावजूद सुधार नहीं होने वाले मामलों, असामान्य निमोनिया, टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम और स्क्रब टाइफस जैसे विषयों पर जानकारी साझा की।
नवजातों में संक्रमण और दवा प्रतिरोध पर भी चर्चा
तीसरे सत्र में डॉ. निगम प्रकाश नारायण ने नवजात बच्चों में बुखार और मेनिन्जाइटिस के मामलों के साथ-साथ दवा प्रतिरोधी संक्रमणों में एंटीबायोटिक के चयन से जुड़े पहलुओं पर जानकारी दी।
वहीं चौथे सत्र में डॉ. मयंक ने महत्वपूर्ण संक्रमणरोधी दवाओं के इस्तेमाल और उनसे जुड़ी सावधानियों को समझाया। प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों ने अलग-अलग मरीजों के उदाहरणों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा भी की।
चार जिलों के डॉक्टरों ने लिया हिस्सा
आयोजकों के अनुसार, कार्यशाला में दरभंगा, पटना, मधुबनी और समस्तीपुर से 68 चिकित्सक शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. के. एन. मिश्रा, डॉ. एस. सी. यादव, डॉ. कुमार आनंद, डॉ. रिजवान हैदर, डॉ. साजिद हुसैन, डॉ. ओम प्रकाश, डॉ. अमृता मिश्रा, डॉ. पल्लवी और डॉ. इशरत समेत अन्य चिकित्सकों की मौजूदगी रही।
