Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का संकट अब भी गंभीर बना हुआ है. 13 जिलों में 27 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. कहीं गंगा का जलस्तर घट रहा है तो कहीं नदियां रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. राहत शिविरों में भी कई जरूरी सुविधाओं की कमी सामने आ रही है. जानिए किस जिले में कैसा हाल है…
Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है. गंगा, कोसी, गंडक और सरयू समेत कई नदियां उफान पर हैं. राज्य के 13 जिलों में करीब 27.01 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. प्रशासन राहत और बचाव के दावे कर रहा है. लेकिन कई राहत शिविरों में जमीनी हालात अलग तस्वीर दिखा रहे हैं.
कहीं बच्चों के लिए दूध नहीं है तो कहीं महिलाओं को सैनिटरी पैड की सुविधा नहीं मिल रही. कई जगह मवेशियों का चारा खत्म हो चुका है. कुछ जिलों में राहत रसोई अब तक शुरू ही नहीं हो सकी है.
पटना में पानी घटा, पुनपुन अब भी लाल निशान से ऊपर
पटना में गंगा का जलस्तर अब धीरे-धीरे घट रहा है. हालांकि दक्षिणी इलाकों में बाढ़ का असर बना हुआ है. पुनपुन नदी अब भी लाल निशान से 2.93 मीटर ऊपर बह रही है. दीघा मीनार घाट और जेपी गंगा पथ कैंप में लोगों को भोजन और पानी मिल रहा है. लेकिन बच्चों के लिए दूध-बिस्कुट और महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड की व्यवस्था नहीं है.
मनेर के महिनावा राहत शिविर में महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम की सुविधा नहीं है. वहीं पशुओं के लिए चारा की भी समस्या है. ऐसे में बाढ़ पीड़ित परिवारों के सामने इंसानों के साथ मवेशियों को बचाने की भी बड़ी चुनौती है.
सारण में 2.12 लाख लोग बाढ़ की चपेट में
सारण के सात प्रखंडों के 109 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. यहां करीब 2.12 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. जान टोला, रावल टोला और सीढ़ी घाट में राहत शिविरों में शिशुओं के लिए दूध की कमी है. महिलाओं के लिए टॉयलेट की सुविधा भी नहीं है. माही नदी का जमींदारी बांध टूटने से कई इलाकों में पानी फैल गया है. रिसाव रोकने की कोशिश जारी है.
सीवान में सरयू नदी लाल निशान के पार
सीवान के दरौली में सरयू नदी लाल निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. अभी तक रसोई चालू नहीं हुई है. प्रशासन जलस्तर बढ़ने का इंतजार कर रहा है. ऐसे में बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था को लेकर परेशानी बढ़ सकती है. इससे तटीय इलाकों में चिंता बनी हुई है.
गोपालगंज में गंडक के बढ़ते पानी पर नजर
गोपालगंज में गंडक नदी को लेकर प्रशासन अलर्ट है. नदी में 1.21 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. हालांकि, जिले में एक भी स्वीकृत राहत शिविर या रसोई चालू नहीं हो सकी है.
भागलपुर में गंगा उच्चतम स्तर पर, 2.17 लाख आबादी प्रभावित
भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा ने नया रिकॉर्ड बनाया है. सोमवार को जलस्तर 36.77 मीटर तक पहुंच गया. इससे पहले 2021 में 36.75 मीटर का रिकॉर्ड था. जिले में करीब 2.17 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. एनएच-80 पर करीब ढाई फीट पानी बह रहा है. इसके चलते आवागमन बंद है.
मुंगेर में डेंजर लेवल से 1.27 मीटर ऊपर गंगा
मुंगेर के बरियारपुर में गंगा खतरे के निशान से 1.27 मीटर ऊपर बह रही है. नदी का पानी सैकड़ों घरों में घुस चुका है. लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की परेशानी के साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.
कटिहार में 3.43 लाख लोग बाढ़ से घिरे
कटिहार में गंगा और कोसी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है. जिले की 35 पंचायतों में करीब 3.43 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. कई इलाकों में लोगों का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है.
खगड़िया में कोसी-बागमती का तेज बहाव
खगड़िया में कोसी और बागमती के तेज बहाव ने दियारा इलाकों की चिंता बढ़ा दी है. चौथम प्रखंड समेत दियारा क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बना हुआ है. नदी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है.
शेखपुरा में घरों और स्कूलों में घुसा पानी
शेखपुरा में हरोहर नदी का पानी पांच पंचायतों के घरों तक पहुंच गया है. कई स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी पानी की चपेट में हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं.
आरा में भी जलस्तर बढ़ गया है. बाढ़ के पानी में डूबने से 32 वर्षीय चितरंजन पासवान की मौत हो गई. बाढ़ के बीच लोगों को नदी और तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहने की चुनौती दी जा रही है.
फरक्का से पानी छोड़े जाने के बाद पटना-बक्सर में राहत
फरक्का बैराज से 15 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद भी गंगा का दबाव बना हुआ है. हालांकि पटना और बक्सर में गंगा का जलस्तर थोड़ा नीचे आया है.
दूसरी ओर भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. ऐसे में बिहार के अलग-अलग जिलों में बाढ़ की स्थिति एक जैसी नहीं है. कहीं पानी घट रहा है तो कहीं हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं.
