Samrat Choudhary First Pod Cast : बिहार हर साल बाढ़ से जूझता है. अब सरकार राहत और बचाव से आगे बढ़कर स्थायी समाधान पर ध्यान केंद्रित कर रही है. नेपाल से आने वाले पानी को नियंत्रित करने के लिए हाई-लेवल डैम की तैयारी और नदी जोड़ो परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है.
Samrat Choudhary First Pod Cast : बिहार में हर साल नेपाल से आने वाली कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला और महानंदा जैसी नदियां बाढ़ की बड़ी वजह बनती हैं. अचानक आई बाढ़ के दौरान NDRF और SDRF की टीमों ने रेस्क्यू अभियान चलाकर करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला और प्रभावित इलाकों में कम्युनिटी किचन के जरिए राहत पहुंचाई.
अब सरकार का जोर सिर्फ राहत और बचाव तक सीमित नहीं, बल्कि बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान पर है. इसी दिशा में नेपाल से आने वाले पानी को नियंत्रित करने के लिए हाई-लेवल डैम की DPR को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है.
नदी जोड़ो परियोजनाओं और तटबंधों के जीर्णोद्धार पर जोर
बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ बिहार में नदियों के बेहतर प्रबंधन के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर काम हो रहा है. कोसी-मेची लिंक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि बागमती और बूढ़ी गंडक को जोड़ने का काम पूरा होने की बात कही गयी है.
इसके अलावा कोसी और गंडक के पूरे इकोसिस्टम तथा तटबंधों को मजबूत और दुरुस्त करने के लिए केंद्रीय जल आयोग और नाबार्ड के सहयोग से DPR तैयार की जा रही है. सरकार का लक्ष्य नदी के बहाव, जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण को एक साथ जोड़कर दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार करना है.
फरक्का बैराज, गाद और बिहार के जल अधिकार का मुद्दा
बिहार में नदी प्रबंधन के साथ गंगा के पानी और फरक्का बैराज को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया जा रहा है. राज्य सरकार का कहना है कि बिहार को पीने के पानी, सिंचाई और उद्योगों की जरूरत के लिए अपने हिस्से के पानी के उपयोग का प्राथमिकता से अधिकार मिलना चाहिए.
साथ ही फरक्का बैराज के कारण गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा होने से नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित होने की बात कही जा रही है. ऐसे में बिहार के लिए बाढ़ नियंत्रण के साथ जल अधिकार, गाद प्रबंधन और गंगा के बेहतर प्रवाह को भी मास्टरप्लान में शामिल करना अहम माना जा रहा है.
