दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा प्रखंड के विश्वनाथपट्टी गांव में एक परिवार ने समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। परंपरागत मृत्युभोज पर खर्च करने के बजाय परिवार ने 2100 पौधों का रोपण और वितरण कर अपनी 94 वर्षीय माता स्वर्गीय रत्नी देवी को अनोखी श्रद्धांजलि दी। इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
भौगोलिक संदर्भ
ग्लोबल ग्रीन मिशन के संस्थापक एवं पर्यावरण प्रेमी संजय कुमार कुशवाहा की माता रत्नी देवी का 22 जुलाई 2026 को निधन हो गया था। परिवार ने श्राद्ध, पिंडदान और हवन सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत रीति-रिवाजों से संपन्न कराए, लेकिन मृत्युभोज का आयोजन नहीं किया। इसके स्थान पर ‘हरित श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम के तहत 2100 पौधे लगाए और लोगों के बीच वितरित किए गए।
कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी अतिथियों को सादा भोजन कराया गया। विदाई के समय प्रत्येक अतिथि को एक पौधा भेंट किया गया, ताकि वे भी पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान का हिस्सा बन सकें।
रत्नी देवी के बड़े पुत्र विजय प्रसाद ने बताया कि परिवार ने सामाजिक दबाव की परवाह किए बिना मृत्युभोज का बहिष्कार किया। उनका कहना है कि एक दिन के भोज पर होने वाला खर्च यदि पौधरोपण में लगाया जाए तो उसका लाभ समाज और आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक मिलता है। उन्होंने इस पहल को जनजागरूकता अभियान का स्वरूप देने की बात कही।
संजय कुमार कुशवाहा ने कहा कि उनकी मां को पौधों से विशेष लगाव था। इसलिए उनकी स्मृति में पौधे लगाना ही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। उनका मानना है कि कार्यक्रम के तहत लगाए और वितरित किए गए 2100 पौधे आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित होंगे।
यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किसी प्रियजन की स्मृति को समाजहित से जोड़कर हमेशा के लिए जीवित रखा जा सकता है।
