भागलपुर: राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर द्वारा टीएमबीयू के मनोविज्ञान विभाग में आयोजित आठ दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को समापन हुआ। कार्यशाला की अध्यक्षता हेड डॉ. लक्ष्मी पांडेय ने की।
समापन समारोह में डॉ. लक्ष्मी पांडेय ने कहा कि यह कार्यशाला केवल अनुवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज्ञान-विनिमय, शैक्षणिक संवाद, भाषायी समृद्धि और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण मंच बनी।
संस्थान के समन्वयक सह विषय विशेषज्ञ डॉ. शंभू कुमार सिंह ने बताया कि कार्यशाला में शामिल सभी विषय विशेषज्ञों के पास दीर्घ शैक्षणिक अनुभव और उत्कृष्ट विद्वता थी। उनके गहन विषय-ज्ञान, सूक्ष्म विश्लेषण और रचनात्मक सुझावों ने ‘द इकोनॉमिक हेरिटेज ऑफ मिथिला’ के मैथिली अनुवाद को एक महत्वपूर्ण बौद्धिक प्रयास में बदल दिया।
विषय विशेषज्ञ एवं पुस्तक के लेखक डॉ. शैलेन्द्र कुमार झा ने कहा कि मैथिली में अनुवाद के बाद भी पुस्तक की मौलिकता और प्रभाव में कोई कमी नहीं आई है। सभी विषय विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से मैथिली में अनुवादित पुस्तक ‘मिथिलाक आर्थिक विरासत’ को डॉ. शंभू कुमार को समर्पित किया।
डॉ. शंभू कुमार ने बताया कि लगभग एक महीने में यह पुस्तक प्रकाशित होने की संभावना है। इसके बाद भारतीय भाषा संस्थान की वेबसाइट पर भी पुस्तक उपलब्ध होगी, जहां से पाठक इसे खरीद सकेंगे।
कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. रामाशीष पूर्वे, पूर्व मैथिली हेड डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय, विभाग की डॉ. सपना, डॉ. विवेकानंद, डॉ. चंदा, डॉ. कुमारी आरती, डॉ. रंजीत कुमार सिंह, डॉ. केके मंडल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
