भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के मनोविज्ञान विभाग में आयोजित आठ दिवसीय अनुवाद कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला के दौरान ‘The Economic Heritage of Mithila’ पुस्तक का मैथिली में अनुवाद पूरा किया गया। अनुवादित पुस्तक को ‘मिथिलाक आर्थिक विरासत’ नाम दिया गया है।
आठ दिवसीय कार्यशाला में हुआ अनुवाद कार्य
यह कार्यशाला राष्ट्रीय अनुवाद मिशन और भारतीय भाषा संस्थान (CIIL), मैसूर से जुड़ी पहल के तहत आयोजित की गई थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता TMBU के मनोविज्ञान विभाग की हेड डॉ. लक्ष्मी पांडेय ने की।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने पुस्तक की सामग्री को मैथिली में रूपांतरित करने पर काम किया। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल अनुवाद तक सीमित नहीं था, बल्कि शैक्षणिक संवाद और भाषाई ज्ञान को आगे बढ़ाना भी था।
‘The Economic Heritage of Mithila’ का मैथिली रूप
इस परियोजना के तहत ‘The Economic Heritage of Mithila’ का मैथिली अनुवाद ‘मिथिलाक आर्थिक विरासत’ के नाम से तैयार किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, पुस्तक के लेखक और विषय विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार झा ने कहा कि मैथिली अनुवाद के दौरान पुस्तक की मौलिकता को बनाए रखा गया है। अनुवाद में शामिल विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से तैयार पुस्तक को डॉ. शंभू कुमार सिंह को समर्पित किया।
जल्द प्रकाशित होने की जानकारी
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि अनुवादित पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग एक महीने में पुस्तक प्रकाशित होने की उम्मीद जताई गई थी और बाद में इसे भारतीय भाषा संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की बात कही गई।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में TMBU के कुलसचिव डॉ. रामाशीष पूर्वे, पूर्व मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय, डॉ. सपना, डॉ. विवेकानंद, डॉ. चंदा, डॉ. कुमारी आरती, डॉ. रंजीत कुमार सिंह और डॉ. केके मंडल समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
मैथिली में ज्ञान-साहित्य को बढ़ावा
‘मिथिलाक आर्थिक विरासत’ का अनुवाद केवल भाषा परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं है। ऐसी पुस्तकों के मैथिली रूपांतरण से स्थानीय पाठकों के लिए इतिहास, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विरासत से जुड़ी सामग्री अपनी मातृभाषा में उपलब्ध हो सकती है।
