केवटी (दरभंगा): संतानक दीर्घायु, स्वस्थ जीवन आ सुख-समृद्धिक कामना सँ मिथिलाक माता सभ जितिया व्रतक तैयारीमे जुटि गेल छथि। दरभंगाक केवटी बाजार मे पर्वसँ जुड़ल पूजन सामग्रीक दोकान सजि गेल अछि। बाँसक डलिया, मरुआक आटा, बजरी आ फल-मूलक खरीदारी बढ़ि रहल अछि। घर-घरमे पारंपरिक विधि-विधानक तैयारी चलि रहल अछि।
3 अक्टूबरकेँ होयत निर्जला जितिया व्रत
पंडित आदित्यनाथ झाक अनुसार, आश्विन मासक कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथिमे जितिया व्रत कयल जाइत अछि। एहि वर्ष 3 अक्टूबर, शनिदिन महिलासभ संतानक मंगल आ दीर्घायु लेल निर्जला उपवास रखतीह।
मिथिला विश्वविद्यालय पंचांगक अनुसार, अष्टमी तिथि 3 अक्टूबरकेँ सबेरे 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू होयत आ 4 अक्टूबर, रविदिन सबेरे 7 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होयत।
2 अक्टूबरकेँ होयत नहाय-खाय
जितिया व्रतसँ पहिने 2 अक्टूबर, शुक्र दिन नहाय-खाय होयत। मिथिला विश्वविद्यालय पंचांगक अनुसार, एहि दिन विशेष भोजन ओगठन रात्रिक अंत धरि अथवा संभव हो तँ सबेरे चारि बजे धरि कय लेबाक चाही। तकर बाद महिलासभ निर्जला व्रतक संकल्प लेतीह।
जीमूतवाहनक पूजा करतीह मातासभ
3 अक्टूबरकेँ जीमूतवाहन पूजा, जितिया उपवास आ महालक्ष्मी व्रत कयल जायत। एहि अवसर पर महिला सभ अपन संतानक दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य आ परिवारक सुख-समृद्धिक कामना करतीह। निर्जला उपवास रखबाक कारण एहि व्रतकेँ कठिन तपस्याक रूपमे सेहो देखल जाइत अछि।
केवटी बाजारमे पूजन सामग्रीक खरीदारी तेज
जितिया पर्व नजदीक अयलाक संग केवटी बाजार मे चहल-पहल बढ़ि गेल अछि। बाँसक डलिया, मरुआक आटा, बजरी आ अन्य पूजन सामग्रीक दोकान सजि गेल अछि। फल-मूलक बिक्री सेहो बढ़ि रहल अछि। पर्वक दिन नजदीक अयबाक संग दोकानदार सभकेँ कारोबार मे आओर तेजी आबयबाक आशा अछि।
महिलासभमे देखल जा रहल उत्साह
जितिया व्रत केँ लऽ कऽ महिला सभमे विशेष उत्साह देखल जा रहल अछि। घरमे पूजन सामग्री जुटेबाक संग पारंपरिक रीति-रिवाजक तैयारी सेहो शुरू भऽ गेल अछि। मातासभ लेल ई पर्व केवल उपवास नहि, बल्कि अपन संतानक स्वस्थ आ दीर्घ जीवनक मंगलकामनासँ जुड़ल आस्थाक प्रतीक अछि।
महाभारतकालीन कथासँ जुड़ल अछि जितियाक मान्यता
जीवित्पुत्रिका व्रतक धार्मिक मान्यता महाभारत कालीन कथासँ जुड़ल मानल जाइत अछि। प्रचलित मान्यताक अनुसार, द्रोणाचार्यक मृत्यु आ कौरव सभक पराजयक बाद अश्वत्थामा पांडव सभक शिविरमे जा द्रौपदीक पाँच पुत्रक हत्या कऽ देलक। एकर बाद ओ अभिमन्युक पत्नी उत्तरेक गर्भ मे पलि रहल शिशुकेँ सेहो ब्रह्मास्त्रसँ मारबाक प्रयास कयलक।
भगवान कृष्ण बचौलनि गर्भस्थ शिशु केँ
धार्मिक मान्यताक अनुसार, भगवान कृष्ण उत्तरेक गर्भ मे मृतप्राय शिशुकेँ जीवन दान देलनि। एहि कारण शिशुक नाम जीवित्पुत्रिका पड़ल। मानल जाइत अछि जे एहि प्रसंगसँ संतानक दीर्घायु आ स्वस्थ जीवनक कामनासँ जीवित्पुत्रिका व्रत करबाक परंपरा जुड़ल।
4 अक्टूबर केँ होयत पारण
पंचांगक अनुसार, 4 अक्टूबर, रविदिन सबेरे 7 बजकर 38 मिनट पर अष्टमी तिथि समाप्त होयत। तकर बाद महिलासभ व्रत पारण करतीह। एहि संग निर्जला जितिया व्रत पूरा होयत।
केवटी सहित समूचा मिथिलांचल मे जितिया पर्व केँ लऽ कऽ धार्मिक उत्साह देखल जा रहल अछि। बाजार मे पूजन सामग्रीक खरीदारी आ घर-घरमे चलि रहल तैयारी सँ पर्वक रौनक बढ़ि गेल अछि।
नोट: व्रत आ पारणक समय प्रकाशित करबाक पहिने स्थानीय पंचांग वा पुरोहितसँ एक बेर पुष्टि कऽ ली।
