सीतामढ़ी। मिथिला की पारंपरिक कला और स्थानीय महिलाओं की रचनात्मक पहल को आगे बढ़ाने वाली सीतामढ़ी की रुबीना की कहानी उन प्रयासों से जुड़ी है, जिनमें स्थानीय हुनर को व्यापक पहचान दिलाने की कोशिश की गई है।
रुबीना का नाम कोविड-19 महामारी के दौरान सीतामढ़ी में महिलाओं की भागीदारी वाली गतिविधियों के संदर्भ में सामने आया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डिजाइनर मास्क-राखी भेजी थी, जिसके जवाब में प्रधानमंत्री की ओर से उन्हें पत्र मिला था। इस पहल की स्थानीय स्तर पर भी सराहना हुई थी।
महिलाओं ने मिलकर बनाए थे डिजाइनर मास्क
2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीतामढ़ी में महिलाओं ने बड़े स्तर पर मास्क तैयार किए थे। इनमें कुछ मास्क पर मधुबनी पेंटिंग की डिजाइन भी बनाई गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में 13,545 महिलाओं ने भाग लिया और कुल 5.15 लाख से अधिक मास्क तैयार किए गए थे। इस पहल को ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर पैदा करने से भी जोड़ा गया था।
रुबीना भी इस अभियान से जुड़ी थीं। रिपोर्ट के अनुसार, उनके परिवार के सदस्यों ने भी मास्क बनाने में भाग लिया था।
प्रधानमंत्री को भेजी थी डिजाइनर मास्क-राखी
रुबीना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक डिजाइनर मास्क-राखी भेजी थी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री की ओर से उन्हें पत्र मिला। इस पत्र को रुबीना और स्थानीय प्रशासन ने प्रोत्साहन के रूप में देखा।
यह घटना बताती है कि स्थानीय स्तर पर महिलाओं द्वारा किए गए छोटे प्रयास भी व्यापक स्तर पर पहचान हासिल कर सकते हैं, खासकर जब उनमें स्थानीय कला और रचनात्मकता का समावेश हो।
मिथिला कला और महिला उद्यमिता का जुड़ाव
मिथिला पेंटिंग सिर्फ एक पारंपरिक चित्रकला नहीं है, बल्कि बिहार और मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय महिलाएं लंबे समय से इस कला के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ाती रही हैं।
जब पारंपरिक चित्रकला को कपड़े, मास्क, सजावटी सामान और दूसरे उपयोगी उत्पादों से जोड़ा जाता है, तो कलाकारों के लिए बाजार और आय के नए अवसर बन सकते हैं।
रुबीना से जुड़ी कहानी भी इसी व्यापक संदर्भ में देखी जा सकती है—जहां स्थानीय महिलाओं की मेहनत, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास को पहचान दिलाने की कोशिश हुई।
सीतामढ़ी से जुड़ी ऐसी कहानियों को मिले जगह
मिथिलानी के लिए इस तरह की स्थानीय कहानियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये केवल किसी व्यक्ति की उपलब्धि नहीं बतातीं, बल्कि मिथिला की कला, महिलाओं की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर होने वाले सामाजिक-आर्थिक बदलाव को भी सामने लाती हैं।
