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मुख्य बिंदु :

  • नवादा गाममे करीब सवा सय बरखसँ एक दिन पहिने मनाओल जाइत अछि दीपावली।
  • एहि अनूठी परंपराक संबंध दरभंगा राजघराना आ पहलवान सुखदेवसँ जुड़ल बताओल जाइत अछि।
  • दीपोत्सवसँ पहिने सामूहिक सफाइ, भगवती मंदिरमे पूजा आ एकजुटताक देखाइत अछि अनूठा उदाहरण।

संवाद सहयोगी, बेनीपुर (दरभंगा)। देशभरिमे जतय दीपावली एक्के दिन मनाओल जाइत अछि, ओतहि बेनीपुरक नवादा गाममे दीपावलीक उत्सव एक दिन पहिनहि शुरू भऽ जाइत अछि। करीब सवा सय बरखसँ चलि आबि रहल एहि अनूठी परंपरामे पीढ़ी बदलल, रहन-सहन बदलल आ गामक स्वरूप सेहो आधुनिक भेल, मुदा एक दिन पहिने दीपोत्सव मनयबाक परंपरा आइयो कायम अछि।

आधुनिक पीढ़ी सेहो एहि परंपराकेँ अपन सांस्कृतिक पहचान आ पूर्वजक धरोहर मानैत अछि। पहिने माटिक दीया, सरिसोक तेल आ पारंपरिक सजावटसँ दीपावलीक रौनक बढ़ैत छल, मुदा आब रंग-बिरंगी एलईडी लाइट, आकर्षक झालर आ बिजलीक सजावटी उपकरण सेहो उत्सवक हिस्सा बनि गेल अछि।

गामक युवा सोहन झा, दिलीप कुमार झा, रमेश झा आ अशोक झा बतबैत छथि जे करीब 14 हजार आबादी बला एहि गाममे दीपावली केवल रोशनी आ आतिशबाजीक पर्व नहि, बल्कि सामूहिक एकजुटता, पूर्वजक स्मृति आ सांस्कृतिक विरासतकेँ सहेजबाक अवसर सेहो अछि।

नई पीढ़ीक इच्छा अछि जे आगू आबयवला समयमे सेहो नवादाक ई विशिष्ट पहचान बनल रहय। युवासभ लेल ई गर्वक विषय अछि जे हुनका सभक गाममे दीपोत्सव एक दिन पहिने मनाओल जाइत अछि। गामक भगवतीक प्रति आस्था आ दीपावलीसँ जुड़ल पारंपरिक मान्यता आइयो लोकसभकेँ एक सूत्रमे बान्हने अछि।

दरभंगा राजघरानासँ जुड़ल अछि परंपरा

गामक बुजुर्ग रमानंद झा कहैत छथि जे ई परंपरा पूर्वजक आस्थासँ जुड़ल अछि। एहि परंपराक संबंध दरभंगा राजघरानासँ जोड़ल जाइत अछि। कहल जाइत अछि जे महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह (1880-1898) क शासनकालमे गामक पहलवान सुखदेव पर महाराजक विशेष कृपा छलनि।

सुखदेव पहलवान राजघरानामे देशक अलग-अलग राज्यसँ आएल पहलवानसभक कुश्ती प्रतियोगिता करबैत छलाह। ओहो कुश्तीमे भाग लैत छलाह आ जीत हासिल करैत छलाह। एहि कारणेँ महाराज हुनकापर विशेष कृपा रखैत छलाह।

नवादा गामक ग्रामीणसभक राजमहलमे सेहो आन-जाय लागल रहैत छल। ओहि समय दरभंगा महाराजक ओतय दीपावली एक दिन पहिने मनाओल जाइत छल। एहि परंपरासँ प्रभावित भऽ नवादा गामक लोक सेहो एक दिन पहिने दीपोत्सव मनयबाक शुरुआत कयलनि। धीरे-धीरे ई परंपरा गामक विशिष्ट पहचान बनि गेल।

दीपोत्सवसँ पहिने गाम बनैत अछि एक परिवार, होइत अछि सामूहिक सफाइ

दीपावलीक तैयारी कतेको दिन पहिनेसँ शुरू भऽ जाइत अछि। गामक गली, रास्ता आ सार्वजनिक स्थानक सफाइमे ग्रामीणसभ सामूहिक रूपसँ जुटैत छथि। घरक आसपाससँ लऽ कऽ नवादा भगवती मंदिर परिसर धरि सफाइ कयल जाइत अछि।

एहि दौरान गामक लोक अपन जिम्मेदारी बुझैत श्रमदान करैत छथि। एहि काजमे बुजुर्गसभक अनुभव आ युवासभक उत्साह दुनू देखबाक लेल भेटैत अछि। गामसँ बाहर रहनिहार लोकसभ लेल सेहो ई पर्व अपन माटि आ गामसँ जुड़बाक एकटा खास अवसर बनैत अछि।

दीपावली पर बाहरसँ सेहो गाम अबैत छथि लोक

दीपावलीक अवसर पर बाहर रहनिहार बहुत रास लोक अपन गाम लौटैत छथि। बाहरसँ आएल रामप्रीत झा कहैत छथि जे ओ दीपावलीसँ एक सप्ताह पहिने दिल्लीसँ गाम आबि गेलाह। हुनकर कहब छनि जे बच्चासभमे एहि पर्वकेँ लऽ कऽ बहुत उत्साह अछि।

दीपोत्सवक साँझ भगवती मंदिरमे होइत अछि सिंहासनक पूजा

दीपोत्सवक साँझ गामक लोक नवादा भगवती मंदिरमे एकत्रित होइत छथि। मंदिरमे देवीक कोनो प्रतिमा नहि अछि, बल्कि ओतय पाथरक एकटा सिंहासन स्थापित अछि। ग्रामीणसभ एहि सिंहासनकेँ शक्तिक प्रतीक मानैत पूजा-अर्चना करैत छथि।

सामूहिक पूजाक बाद गामक घर-घरमे दीप जराओल जाइत अछि। दीपक रोशनीसँ पूरा नवादा गाम जगमगा उठैत अछि। एहि तरहें सवा सय बरख पुरान परंपरा आइयो नवादा गामक लोकसभकेँ अपन संस्कृति, आस्था आ एकजुटतासँ जोड़ने रखने अछि।

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