कई परिवार बच्चों की परवरिश से जुड़ी इन जिम्मेदारियों को आपस में बांटने की कोशिश करते हैं लेकिन रिसर्च में बार-बार यही पाया गया है कि बच्चों के स्कूल से जुड़े ज्यादातर काम अक्सर मां ही करती हैं.
स्कूल का नया सेशन शुरू होते ही अभिभावकों के सामने जिम्मेदारियों की एक लंबी सूची आ जाती है. इसमें बच्चों के लिए स्कूल का सामान खरीदना, फॉर्म का ध्यान रखना, आने-जाने की व्यवस्था करने के साथ ही टीचर्स और स्कूल प्रशासन के लगातार आने वाले ई-मेल का जवाब देना शामिल होता है. कई परिवार इन जिम्मेदारियों को आपस में बांटने की कोशिश करते हैं लेकिन रिसर्च में बार-बार यही पाया गया है कि बच्चों के स्कूल से जुड़े ज्यादातर काम अक्सर मां ही करती हैं.
इसमें सिर्फ स्कूल के प्रोग्राम में शामिल होना या बच्चे के लिए भोजन पैक करना ही शामिल नहीं है, बल्कि ऐसी कई जिम्मेदारियां होती हैं जो मामूली नजर आती हैं. इनमें डॉक्टर से मिलने का समय तय करना, स्कूल के बाद की ऐक्टिविटी में उन्हें शामिल करना, शिक्षकों और स्कूल प्रशासक के ईमेल या फोन कॉल का जवाब देना.
The Conversation में छपी रिसर्च में शामिल लोगों ने इस आर्टिकल में लिखा कि वे यह समझना चाहते थे कि क्या स्कूल भी अनजाने में इस लैंगिक असमानता को बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि वे पिता की तुलना में माताओं से अधिक संपर्क करते हैं. हमारे हालिया रिसर्च से संकेत मिलता है कि ऐसा वास्तव में हो रहा है.
