बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी स्कूल से घर तक पहुंचाने में माता-पिता दोनों की भूमिका होती है। लेकिन कुछ research में यह सवाल उठाया गया है कि स्कूलों का communication क्या अनजाने में माताओं के साथ ज्यादा हो जाता है? इसका असर बच्चों की देखभाल और parenting responsibilities के बंटवारे पर भी पड़ सकता है।
The Conversation में प्रकाशित एक research-based article में researchers ने इसी सवाल की पड़ताल की है। इसमें बताया गया कि बच्चों से जुड़े स्कूल के कई कामों में mothers की भागीदारी अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देती है।
स्कूल से जुड़े कौन-कौन से काम होते हैं?
बच्चे की शिक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां केवल स्कूल की फीस जमा करने या parent-teacher meeting में जाने तक सीमित नहीं होतीं।
इनमें कई रोजमर्रा के काम शामिल हो सकते हैं, जैसे:
- स्कूल की ओर से भेजे गए ईमेल या संदेश देखना
- शिक्षक से बातचीत करना
- स्कूल की गतिविधियों की जानकारी रखना
- बच्चे के लिए जरूरी सामान की व्यवस्था करना
- डॉक्टर या अन्य appointments तय करना
- स्कूल के बाद की activities से जुड़ी जानकारी संभालना
आपके original article में भी इन जिम्मेदारियों में mothers की अधिक भागीदारी के research findings का उल्लेख किया गया है।
क्या स्कूल खुद इस अंतर को बढ़ा सकते हैं?
Research में एक महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या school communication का तरीका इस gender gap को अनजाने में बढ़ा सकता है।
अगर किसी बच्चे के स्कूल की ओर से ज्यादातर फोन, email या दूसरे updates लगातार एक ही parent को भेजे जाते हैं, तो धीरे-धीरे उस parent पर school-related responsibilities ज्यादा आ सकती हैं।
The Conversation में प्रकाशित research में researchers ने इसी संभावित pattern को समझने की कोशिश की है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्कूल या हर परिवार में ऐसा ही होता है। परिवारों की परिस्थितियां, माता-पिता की नौकरी, उपलब्ध समय और communication preferences अलग-अलग हो सकती हैं।
दोनों माता-पिता की भागीदारी क्यों जरूरी है?
बच्चे की शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण decisions में माता और पिता दोनों को जानकारी मिलना उपयोगी हो सकता है। स्कूल यदि संभव हो तो जरूरी communications दोनों parents तक पहुंचाने के विकल्प रख सकते हैं।
इससे parenting और school-related responsibilities को परिवार की परिस्थिति के अनुसार बांटने में मदद मिल सकती है।
स्कूलों के लिए क्या सीख है?
School-parent communication को केवल “किसे message भेजना है” तक सीमित देखने के बजाय यह भी देखना जरूरी है कि information किस तरह और किन parents तक पहुंच रही है।
माता-पिता दोनों को समान रूप से महत्वपूर्ण school updates उपलब्ध कराने की व्यवस्था communication में किसी एक parent पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने में मदद कर सकती है।ation में छपी रिसर्च में शामिल लोगों ने इस आर्टिकल में लिखा कि वे यह समझना चाहते थे कि क्या स्कूल भी अनजाने में इस लैंगिक असमानता को बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि वे पिता की तुलना में माताओं से अधिक संपर्क करते हैं. हमारे हालिया रिसर्च से संकेत मिलता है कि ऐसा वास्तव में हो रहा है.
