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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए फुटबॉल, वॉलीबॉल और कबड्डी कोचिंग के तीन नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, बीसीए-एमसीए में गणित की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई।

 दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आनलाइन माध्यम से विद्वत परिषद् की बैठक हुई। कुलपति आवासीय कार्यालय के सभाकक्ष में संपन्न हुई बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने, नए रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को हरी झंडी देने और छात्रों की सहूलियत के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने खेलकूद और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए अहम फैसला लिया है। विश्वविद्यालय के खेल एवं शारीरिक शिक्षा निदेशालय की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छह महीने (छमाही) के तीन नए सर्टिफिकेट कोर्स संचालित करने की अनुमति प्रदान की गई है।

इनमें ‘ सर्टिफिकेट कोर्स इन फुटबाल कोचिंग ‘, ‘ सर्टिफिकेट कोर्स इन वालीबाल कोचिंग ‘ और ‘ सर्टिफिकेट कोर्स इन कबड्डी कोचिंग ‘ शामिल हैं।

इन पाठ्यक्रमों के शुरू होने से खेल क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं को पेशेवर कोचिंग का ज्ञान और डिग्री मिल सकेगी। संचालन प्रो. अशोक कुमार मेहता जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डा. दिव्या रानी हंसदा ने किया।

बैठक में प्रो. दिलीप कुमार चौधरी, प्रो. सिद्धार्थ शंकर सिंह, प्रो. मो. नौशाद आलम, प्रो. संजय झा, डा. अनिल कुमार चौधरी, डा. कृष्णकान्त झा समेत कई संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं विशेष आमंत्रित सदस्य उपस्थित थे।

बीसीए और एमसीए के नामांकन नियमों में राहत

व्यावसायिक शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से विद्वत परिषद् ने बैचलर आफ कंप्यूटर एप्लीकेशन और मास्टर आफ कंप्यूटर एप्लीकेशन पाठ्यक्रमों के नामांकन नियमों में संशोधन किया है।

बिहार लोकभवन की ओर से निर्गत आदेशों के अनुरूप अब इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12वीं स्तर पर गणित विषय की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। ऐसे छात्र जिनका 12 वीं में गणित विषय नहीं था, वे भी अब बीसीए या एमसीए में नामांकन ले सकेंगे।

हालांकि, ऐसे छात्रों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा एक अनिवार्य ‘ब्रिज कोर्स’ कराया जाएगा, ताकि वे कंप्यूटर साइंस के गणितीय आधार को समझ सकें। बैठक के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के 31 प्रमुख विषयों के संशोधित सिलेबस को भी विद्वत परिषद् ने अपनी स्वीकृति दे दी।

साथ ही, सेल्फ-फाइनेंस मोड के तहत एमएससी बायोटेक्नोलाजी प्रोग्राम प्रारंभ करने के लिए तैयार किए गए रेगुलेशन एवं आर्डिनेंस को मंजूरी दी गई। अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम के संशोधित अध्यादेश और ‘संबंधन एवं नई शिक्षण कार्यक्रम समिति’ की बैठक में लिए गए निर्णयों का भी अनुमोदन किया गया।

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