Sawan Special: बिहार के सारण जिले के सोनपुर में गंगा और गंडक नदी के पवित्र संगम (हरिहर क्षेत्र) पर स्थित एक ऐतिहासिक और पौराणिक हिंदू मंदिर बाबा हरिहरनाथ मंदिर है. यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसके गर्भगृह में स्थापित मुख्य शिवलिंग में भगवान विष्णु (हरि) और भगवान शिव (हर) दोनों एक साथ समाहित हैं.

सावन के पावन महीने में सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर में भगवान हरि और हर का विशेष श्रृंगार किया गया. हर दिन बाबा हरिहरनाथ का श्रृंगार अलग अलग स्वरूप में किया जाता है. तस्वीर में बाबा का यह दिव्य स्वरूप बेहद मनमोहक नजर आ रहा है.

सावन में बाबा हरिहरनाथ का फूलों, बेलपत्र और आकर्षक मालाओं से भव्य श्रृंगार किया गया है, जिसे देखकर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर हो रहे हैं. गंदे के फूलों की माला और तरह तरह के फूलों से बाबा का श्रृंगार किया गया है.

सावन के पावन महीने में बाबा हरिहरनाथ का भव्य श्रृंगार किया गया है. फूलों की मालाओं और गेंदे के फूलों से सजे बाबा के दिव्य स्वरूप के साथ शिवलिंग का भी विशेष पूजन-अभिषेक किया गया. दूध और पुष्पों से सजे इस अलौकिक रूप के दर्शन श्रद्धालुओं को भक्तिभाव से भर रहे हैं.

सावन के पावन महीने में बाबा हरिहरनाथ का बेलपत्र से विशेष श्रृंगार किया गया है. बेलपत्र की हरियाली और फूलों की सजावट के बीच बाबा का दिव्य स्वरूप बेहद मनमोहक नजर आ रहा है.

सावन के पावन महीने में बाबा हरिहरनाथ का बेलपत्र से विशेष श्रृंगार किया गया है. बेलपत्र की हरियाली और फूलों की सजावट के बीच बाबा का दिव्य स्वरूप बेहद मनमोहक नजर आ रहा है.

बाबा हरिहरनाथ को सुनहरे और पीले वस्त्रों से सजाया गया है, जबकि चारों ओर गेंदे और सफेद फूलों की लंबी मालाओं से आकर्षक सजावट की गई है. सामने विराजमान स्वरूप को भी सुंदर आभूषणों और वस्त्रों से सजाया गया है.

बाबा हरिहरनाथ मंदिर में भगवान शिव की शिवलिंग को अत्यंत सुंदर, रंगीन मुखौटा से सुसज्जित किया गया है. मुखौटे का रंग हल्का बैंगनी/गुलाबी है, जिस पर सुंदर आँखें, मूँछें और माथे पर त्रिपुंड तथा तिलक बना हुआ है. शिवलिंग और मुखौटे को रुद्राक्ष की मालाओं, ताजे सफेद फूलों और गेंदे के फूलों से बहुत ही मनमोहक रूप से सजाया गया है.

भगवान शिव के शिवलिंग को हरे रंग का एक बेहद सुंदर और शांत मुखौटा से सुसज्जित किया गया है. जिस पर लाल ‘जय महाकाल’ लिखा वस्त्र और फूलों की मालाएं लिपटी हुई हैं. इसके ठीक पीछे नाग-छत्र के साथ मुख्य विग्रह और चारों तरफ छत से लटकती सफेद व गेंदे के फूलों की अनगिनत लड़ियों की अलौकिक सजावट पूरे परिवेश को अत्यंत पवित्र और भक्तिमय बना रही है.
