मिथिला हाट में आयोजित डाली सज्जा प्रतियोगिता में 63 नवविवाहिताओं ने हिस्सा लेकर तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. बारिश के बावजूद प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक था, जिसने मिथिला की पारंपरिक कला को एक नई पहचान दी.

Madhubani News: झंझारपुर स्थित मिथिला हाट में चल रही 12 दिवसीय डाली सज्जा प्रतियोगिता में तीन वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया. एक ही दिन में 63 नवविवाहिताएं अपनी सजी हुई डाली लेकर प्रतियोगिता में शामिल होने पहुंचीं. बीच-बीच में हुई बारिश भी प्रतिभागियों के उत्साह को कम नहीं कर सकी. वर्ष 2025 में एक दिन में 52 प्रतिभागियों के शामिल होने का रिकॉर्ड था, जिसे इस बार 63 प्रतिभागियों ने पीछे छोड़ दिया.

Jhanjharpur News: एक दिन में 63 नवविवाहिताओं की भागीदारी

मिथिला हाट के ओपन थिएटर में आयोजित डाली सज्जा प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में नवविवाहिताएं पारंपरिक रूप से सजी डाली लेकर पहुंचीं. प्रतिभागियों के साथ पहुंचे दर्शकों से पूरा परिसर गुलजार रहा. बारिश के दौरान कुछ समय के लिए प्रतिभागियों को मंच से नीचे उतरना पड़ा, लेकिन मौसम खुलते ही वे दोबारा डाली सज्जा के साथ प्रतियोगिता में शामिल हो गईं.

बारिश भी नहीं कम कर सकी उत्साह

आयोजन के दौरान रुक-रुक कर बारिश होती रही, लेकिन इसका असर प्रतिभागियों के उत्साह पर नहीं पड़ा. मौसम साफ होते ही नवविवाहिताएं अपनी सजी डाली के साथ मंच पर लौटती रहीं. इससे मिथिला हाट की रौनक और बढ़ गई तथा मिथिला की पारंपरिक कला और संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली.

लक्की झा ने हासिल किया प्रथम स्थान

रिकॉर्ड संख्या में प्रतिभागियों के पहुंचने के कारण सर्वश्रेष्ठ डाली का चयन आयोजन समिति के लिए चुनौतीपूर्ण रहा. काफी विचार-विमर्श के बाद पर्ची के माध्यम से पांच उत्कृष्ट डालियों का चयन किया गया. इनमें लक्की झा ने प्रथम स्थान हासिल किया.

सभी प्रतिभागियों को दिया गया प्रशस्ति पत्र

पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में आयोजन समिति की अंबे मिश्रा, कल्याणी झा, आशा झा, विनीता गिरी, नंदिनी सिंह और सीमा देवी ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया. सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया.

पारंपरिक संस्कृति को मिल रही नई पहचान

आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रत्येक दिन महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है. इससे मिथिला की पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिल रही है. डाली सज्जा जैसी प्रतियोगिताएं नई पीढ़ी को मिथिला की परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

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