mithilani

आदिवासी समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उनकी संस्कृति और विरासत से जोड़ने के लिए ‘प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलंपियाड’ की शुरुआत हुई है. यह प्रतियोगिता कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए है, जिसमें उन्हें बौद्धिक विकास के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों से जोड़ा जाएगा.

जमशेदपुर: आदिवासी समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उनकी समृद्ध संस्कृति, इतिहास और विरासत से जोड़ने की दिशा में एक नयी पहल शुरू हुई है. लोहरदगा में गुरुवार को आयोजित ‘आदिवासी शिक्षक मित्र मंडली’ की बैठक में ‘प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलंपियाड’ को लेकर चर्चा हुई. इस बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि आदिवासी समाज के प्रतिभावान बच्चों को सही दिशा और उचित अवसर मिले, तो वे राष्ट्रीय पटल पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं.

बैठक में उपस्थित पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के संयोजक विनोद भगत, बीएस कॉलेज के गणित प्रोफेसर डॉ. अर्जुन लकड़ा और आदिवासी ओलंपियाड टीम के डॉ. विनीत कुमार भगत ने ओलंपियाड के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह प्रतियोगिता कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को तराशने के साथ-साथ उन्हें अपने सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना है.

निःशुल्क बुकलेट से आसान होगी परीक्षा की तैयारी

ओलंपियाड के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया 14 सितंबर से शुरू हो चुकी है, जो 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगी. वहीं, परीक्षा का आयोजन 29 नवंबर 2026 को निर्धारित किया गया है. पंजीकृत विद्यार्थियों को परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए विशेष अध्ययन सामग्री यानी बुकलेट पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाएगी. छात्र यह बुकलेट अपने-अपने जिला समन्वयकों से प्राप्त कर सकेंगे, ताकि हर जरूरतमंद बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री पहुंच सके.

विभिन्न राज्यों से जुट रहे स्वयंसेवक

इस पहल की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसका दायरा अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा. ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जैसे सुदूर क्षेत्रों से भी स्वयंसेवक और शिक्षाप्रेमी इस अभियान से जुड़ रहे हैं. विभिन्न राज्यों की इस सहभागिता से स्पष्ट है कि यह आयोजन देशभर के आदिवासी विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा.

लैपटॉप, टैबलेट और नकद पुरस्कार से बढ़ेगा बच्चों का उत्साह

विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और लगन को बढ़ावा देने के लिए त्रिस्तरीय (जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर) पुरस्कार योजना बनायी जा रही है. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को लैपटॉप, टैबलेट या नकद पुरस्कार से सम्मानित करने का प्रस्ताव है. बैठक में सर्वसम्मति से अपील की गई कि शिक्षक, स्वयंसेवक और सामाजिक संगठन मिलकर लोहरदगा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कराएं.

आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का प्रयास

चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आदिवासी समाज में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है. आधुनिक विषयों के अध्ययन के साथ-साथ बच्चों को अपने इतिहास, परंपराओं और सामुदायिक ज्ञान से जोड़ना बेहद जरूरी है. ओलंपियाड का यह प्रतिस्पर्धी माहौल छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने में मददगार साबित होगा.

सशक्त समाज के निर्माण के लिए एकजुट हुई शिक्षक मंडली

बैठक में शिक्षक मित्र मंडली के सतीश, संतोष, विनोद सहित कई प्रबुद्ध सदस्य उपस्थित रहे. सभी ने एक स्वर में माना कि अधिक से अधिक बच्चों को इस ओलंपियाड से जोड़ना केवल एक प्रतियोगिता का आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज को शैक्षणिक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह प्रयास आने वाले समय में नई पीढ़ी के स्वर्णिम भविष्य की नींव रखेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *