मिथिला शोध संस्थान को भारत का न्यूयार्क बनाने की तैयारी है, जहां प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन और आधुनिक विषयों पर शोध होगा। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने इसके विकास के लिए उच्चस्तरीय बैठक की और 15 दिनों में पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन की बात कही।
मिथिलानी डेस्क, दरभंगा। मिथिला की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा अब आधुनिक तकनीक और शोध के नए दौर से जुड़ने जा रही है। मिथिला शोध संस्थान को ऐसा केंद्र बनाने की तैयारी है, जहां प्राचीन पांडुलिपियों से लेकर आधुनिक विषयों पर अध्ययन और अनुसंधान की सुविधाएं विकसित होंगी। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में भारत का न्यूयार्क बनेगा।
प्राचीन-आधुनिक विद्याओं का संगम
संजय झा ने कहा कि मिथिला शोध संस्थान प्राचीन और आधुनिक विद्याओं के समन्वय का बड़ा केंद्र बनेगा। यहां उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाएगा। संस्थान को देश-विदेश के शोधार्थियों के लिए उपयोगी बनाने पर भी जोर दिया जाएगा।
