Description
यह पारंपरिक बाँस मिथिला विवाह कोबर चित्रकला विवाह के शुभ अवसर पर बनाई जाती है। इसमें बाँस, दूल्हा‑दुल्हन, देवी‑देवता, सूर्य, चंद्रमा, मछली, कमल और अन्य शुभ प्रतीकों का चित्रण होता है।
विशेषताएँ
- बाँस दीर्घायु, लचीलापन और शुभता का प्रतीक है।
- विवाह में इसे समृद्धि और मंगलकामना के रूप में दर्शाया जाता है।
- कोबर चित्रकला में बाँस के साथ पारंपरिक आकृतियाँ विवाह की पवित्रता और सांस्कृतिक गहराई को उजागर करती हैं।
यह कला न केवल सजावट का माध्यम है बल्कि मिथिला संस्कृति और परंपरा की आत्मा को भी जीवंत करती है।
इसे मिथिला विवाह में विशेष महत्व दिया जाता है।







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