Description
कोहबर मिथिला और बिहार की विवाह परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह विवाह के समय बनाया जाने वाला विशेष चित्र होता है, जहाँ दूल्हा‑दुल्हन बैठते हैं और विवाह की रस्में संपन्न होती हैं।
कोहबर विवाह के शुभ अवसर पर बनाई जाती है। इसमें दूल्हा‑दुल्हन, देवी‑देवता, सूर्य, चंद्रमा, बाँस, मछली और अन्य शुभ प्रतीकों का चित्रण होता है। यह कला विवाह के पवित्र बंधन, समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक है।
कोहबर का सांस्कृतिक महत्व
- इसमें मधुबनी/मिथिला पेंटिंग की शैली में चित्र बनाए जाते हैं।
- चित्रों में प्रायः सूर्य, चंद्रमा, बाँस, मछली, कमल, पक्षी और देवी‑देवता दर्शाए जाते हैं।
- यह चित्र विवाह में समृद्धि, शुभता और मंगलकामना का प्रतीक होता है।
- कोहबर को विवाह के बाद भी घर में सौभाग्य और आशीर्वाद के रूप में संजोकर रखा जाता है।
कोहबर मिथिला विवाह की आत्मा है, जो कला, संस्कृति और परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। कोहबर








Reviews
There are no reviews yet.